पुराने ख़त -नीलिमा शर्मा निविया

 पुराने ख़त10610585_10203725664455656_3117869743141719802_n (1)
आज सुबह से व्यस्त हूँ
पुरानी अलमारी में
रखे खतो को संजोने में
कितनी खुशबुए मेरे इर्द गिर्द
सम्मोहित कर रही हैं मुझे
वोह प्यार का पहला ख़त
मुझे मिलने के बाद
पहली ही रात को लिखा
और उस दिन बजता
आल इंडिया रेडियो पर गाना
” कभी आर कभी पार लगा तीरे नजर”
मेरे जन्मदिन पर लिखे अनेको ख़त
जिसमे से सिर्फ एक पोस्ट किया था मुझे
और अंत में फिर से आल इंडिया रेडियो
फिर से साथ था तुम्हारे लफ्जों में
“तुम जो मिल गये हो तो यह लगता हैं ”
वोह विवाह पूर्व का करवाचौथ
और तुम्हारा ख़त
अगले साल हम दोनों साथ होंगे इस दिन
और तुम मेरे लिय सजोगी उस दिन
और इस बार भी अंतिम लाइन
आल इंडिया रेडियो के सौजन्य से
” मांग के साथ तुम्हारा मैंने मांग लिया संसार “ख़त दर ख़त मैं सुनती थी गाने तुम्हारे साथ
ख़त चाहे ४ दिन बाद मिलता
लेकिन गाना उस वक़्त बजता मेरे जहन में
आखिरी ख़त जो मुझे मिला था
विवाह से ३ दिन पहले
लबरेज़ था तुम्हारे प्यार से
अंतहीन प्रतीक्षा से गुजरे विरह को बतलाता हुआ
और तब आप का आल इंडिया रेडियो गा रहा था
‘ वादा करले साजना , तेरे बिना मैं न रहू मेरे बिना तू न रहे “आज भी खतो को पढ़ते हुए
वही स्वर सुन रही हूँ
वही धुन बज रही हैं
वैसे ही थिरक रही हैं मेरी धड़कनसुनो ना
२५ साल पुराने ख़त आज भी इतने ताजा से क्यों हैं

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.सब्ज खवाब से सींच कर
मैंने बोया हैं बीज
नयी आशाओ का
कोसी कोसी धूप
तुम्हारी आगोश की
रिमझिम रिम झिम
ख़ुशी वाले आंसू की
बरसात
तुम्हारे नरम से
लफ्जों का स्पर्श
काफी होंगे
इसके अंकुरण के लिएसुनो तुम आओगे न
मेरे खवाबो की जमीन पर
मेरे अहसासों को पल्लवित करने
मेरी सब पुरानी भूलो को विस्मृत करके ………..हमें नव-प्रेम का सृजन करना है .