खुला आसमाँ हैं

PANKAJ TRIVEDI

 

 

 

 

 

 

 

जहां तक खुला आसमाँ हैं, उड़ान भरता ही रहूँगा,

सफ़र मेरा शुरू हुआ हैं, मुकाम हांसिल ही करूंगा |

 

तुम्हारा साथ है फिर भी तुम नहीं हो मेरे साथ में,

नज़रें बड़ी तीखी हैं लोगों की उनसे बचकर रहूँगा |

 

दुआओं पे भी लोग बेवजह  कोहराम मचाने लगते हैं,

वो दवा के नाम ही ज़हर पिलाएगा तो लडता रहूँगा |

 

तू कहता है हम हिंदू और मुसलमानों के संग हूँ  सदा,

मज़हब की टोपी से इन्कार और कहें आका का रहूँगा |

 

बुजुर्गों की ईंट बजाने से पहले सोच लो ज़रा तुम काफ़िर,

रास्ते के काँटें हटाने वालों पे करता वार कैसे सहता रहूँगा |

 

तू खुदगर्ज़ है औकात क्या है तेरी ये सब लोग जानते हैं,

तेरे ही दामन में खून के कितने छींटे हैं वो दिखाता रहूँगा |

 

पंकज त्रिवेदी