सोचता हूँ क्या लिखूं

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(प्रताप सिंह) सुबहा चाय पी

गलियारे में टहलना लिखूं

या तैयार हो ,

नाश्ते पर – बीबी के बताये

कामों और सामान  की लिस्ट लिखूं I

देर से  ऑफिस पहुचने का डर

या अफसर की डांट लिखूं I

दिन भर काम की उलझन लिखूं ,

या लंच का हसीं मजाक  लिखूं I

शाम को ऑफिस से निकलते ,

ठेले / दुकानदार से किये

भाव – ताव लिखूं ,

या बिगडैल  घोड़े से

भागते दाम लिखूं I

घर आ पगार से बचे

पैसों का हिसाब लिखूं

या कम सामन लाने पर बीबी बच्चों से

कही झूटी कहानियाँ लिखूं I

रात बिस्तर पर पड़ा सोचता हूँ –

सयानी हो रही बेटी की आखों में

उभरते सवाल लिखूं ,

या जवान बेकार बैठे – बेटे के

नजर छुपा कर रहने पर ,

अपने ख्याल लिखूं I

सोचता हूँ क्या लिखूं I