PM मोदी से मिले ईरानी राष्ट्रपति, मिल सकती है चाबहार की चाबी!

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भारत के तीन दिवसीय दौरे पर पहुंचे ईरान के राष्ट्रपति हसन रूहानी आज दिल्ली में रहेंगे. सुबह उन्होंने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की. इसके बाद रूहानी राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि देने राजघाट पहुंचे. माना जा रहा कि आज इस मुलाकात में दोनों देशों के बीच कई करार पर मुहर लगेगी. साथ ही ईरानी चाबहार बंदरगाह को लेकर भी अहम फैसला हो सकता है.

ईरान के राष्ट्रपति हसन रूहानी भारत के तीन दिवसीय दौरे पर गुरुवार को हैदराबाद पहुंचे थे. हैदराबाद में उन्होंने शुक्रवार को कहा था कि खाड़ी देश में चाबहार बंदरगाह भारत के लिए (पाकिस्तान से गुजरे बिना) ईरान और अफगानिस्तान, मध्य एशियाई देशों के साथ यूरोप तक ट्रांजिट मार्ग खोलेगा.

ईरान ने तेल एवं प्राकृतिक गैस के अपने विशाल संसाधनों को भारत के साथ साझा करने तथा द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने के लिए वीजा नियमों में ढील देने की भी इच्छा जताई है. राष्ट्रपति रूहानी ने कहा है कि ईरान के पास प्रचुर मात्रा में तेल एवं गैस संसाधन हैं और वह इन्हें भारत की प्रगति तथा इसके लोगों की समृद्धि के लिए उसके साथ साझा करने की इच्छा रखता है.

भारत को चाबहार पोर्ट से क्या फायदा होगा

चाबहार पोर्ट बनने के बाद सी रूट से होते हुए भारत के जहाज ईरान में दाखिल हो पाएंगे और इसके जरिए अफगानिस्तान और सेंट्रल एशिया तक के बाजार भारतीय कंपनियों और कारोबारियों के लिए खुल जाएंगे. इसलिए चाबहार पोर्ट व्यापार और सामरिक लिहाज से भारत के लिए काफी अहम है.

कहां है चाबहार बंदरगाह

चाबहार दक्षि‍ण पूर्व ईरान के सिस्तान-बलूचिस्तान प्रांत में स्थि‍त एक बंदरगाह है, इसके जरिए भारत अपने पड़ोसी पाकिस्तान को बाइपास करके अफगानिस्तान के लिए रास्ता बनाएगा. यहां इस बात का जिक्र करना जरूरी है कि अफगानिस्तान की कोई भी सीमा समुद्र से नहीं‍ मिलती और भारत के साथ इस मुल्क के सुरक्षा संबंध और आर्थिक हित हैं.

फारस की खाड़ी के बाहर बसे इस बंदरगाह तक भारत के पश्चिमी समुद्री तट से पहुंचना आसान है. इस बंदरगाह के जरिए भारतीय सामानों के ट्रांसपोर्ट का खर्च और समय एक तिहाई कम हो जाएगा. ईरान मध्य एशि‍या और हिंद महासागर के उत्तरी हिस्से के बाजारों तक आवागमन आसान बनाने के लिए चाबहार पोर्ट को एक ट्रांजिट हब के तौर पर विकसित करने की योजना बना रहा है.

2003 में ईरान से हुआ था समझौता

इस बंदरगाह के विकास के लिए हालांकि 2003 में ही भारत और ईरान के बीच समझौता हुआ था. मोदी सरकार ने फरवरी 2016 में चाबहार पोर्ट प्रोजेक्ट के लिए 150 मिलियन डॉलर के क्रेडिट लाइन को हरी झंडी दी थी. परमाणु कार्यक्रमों के चलते ईरान पर पश्चिमी देशों की ओर से पाबंदी लगा दिए जाने के बाद इस प्रोजेक्ट का काम धीमा हो गया. जनवरी 2016 में ये पाबंदियां हटाए जाने के बाद भारत ने इस प्रोजेक्ट पर तेजी से काम करना शुरू कर दिया. करार के तहत दक्षिण-पूर्वी ईरान में चाबहार बंदरगाह के लिए भारत को 8.5 करोड़ डॉलर निवेश करना है.


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