हमारी ईमानदारी का व्यक्तित्व …?

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क्या  किताबों तक ही रह गई हैं हमारी ईमानदारी या इससे भी आगे हैं, हमारी ईमानदारी का व्यक्तित्व?
वक्त गुजर जाता है मुकाम नही मिलता जमाने में सच्चाई को दाम नहीं मिलता,डिग्रीया रखीं है,फाइलों में कैद करके मेहनत -कश हाथों को ही काम नहीं मिलता,चोर उच्चके घूमते हैं लाल बतियां लेकर,नींव के पत्थरों को ही नाम नहीं मिलता,छीन लेते हैं लोग यहां हक दूसरों का भी,यहां जिनका मयखाना उन्हें जाम नहीं मिलता,धोखा करके लोग बना लेते है महल,यहां वफ़ा करने वालों को इनाम नहीं मिलता।।।।।
आज हाय,हेलो का ये गजब जमाना आ गया, लोगों की जुबान पर राम नहीं मिलता,चलें आते है उस दर से खाली हाथ जहां इंसान की मेहनत पर सवाल उठता है!!!!
क्यों आज मेहनत के बाद भी लोग बेकार खड़े हैं और चापलूसों की फौज के साथ देश की सरकार खड़ी हैं।।।।

 


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