कविता-प्रिया वच्छानी

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सुनानी नहीं मुझे दास्ताँ कोई अपनी
बस इतनी सी तो मेरी ये कहानी है

होते हैं जिन पलों में साथ हम और तुम
बस उन्ही पलो में बसती मेरी ज़िंदगानी है

कुछ पलो का सुकून हुआ है हासिल और
चंद बूँदें ख़ुशी की मुझे तुम पर लुटानी है

हासिल है तुम्ही से मुझे मुकम्मल जहान
बिन तेरे ज़िन्दगी लगती मेरी बेमानी है

कतरा-कतरा बन की है मोहब्बत तुमसे
कहती दुनियां ये तो बांवरी, दीवानी है

कहता है, तो कहता रहे ज़माना इसे ख़राब
सौदा नहीं जिस्म का ,इश्क़ तुमसे मेरा रूहानी है।

नाम- प्रिया वच्छानी