गीतिका

shanti नेह मेह अति बरसे
होकर बेकाबू नभ से

 मेघ छोड़ अब पीछा
अवनि पुकारे कब से

 हुआ बहुत जल प्लावन
त्राहिमाम करे सब रब से

बरसों जहाँ हो सूखा
मिले निजात अजल से

कितनी कहाँ हो बारिश
पूछो कभी भू तल से

हुआ बहुत जल प्लावन
करे शान्ति पाठ रब से

शान्ति पुरोहित