मुक्तक स्वरचित

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shanti

मुक्तक

जीने की जब भी चाह होती है
और मुश्किल अथाह होती है
जीत जाते हैं हालात भी गम से
कोई तो कहीं और राह होती है

1
अश्रु का कण
ह्रदय सीप बंद
बनेगा मोती
2
द्वार दिल का
दस्तक अपनापन
नेह छलके
3
दानी सुमन
सर्वस्व करे दान
सदा हर्षाता


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