मील का पत्थर साबित होगा सुप्रीम कोर्ट के तीन तलाक़ का फ़ैसला – राहत जहाँ खानम

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सुप्रीम कोर्ट के तीन तलाक़ का फ़ैजला, एक बेमिसाल व सराहनिये फ़ैसला हाँ जो की भविष्य में मुस्लिम महिलाओं के लिये एक मील का पत्थर साबित होगा, सही मायने में ये फ़ैसला 2- 3 दशक पूर्व आ जाना चाहिए था जिससे हज़ारों लाखों महिलाओं की ज़िंदगी 3 तलाक़ कि दंश से बच जाती और लाखों बच्चों का भविष्य बर्बाद ना होता
वास्तव मे 3 तलाक़ एक बहुत बड़ी सामाजिक कुरीति थी इसका ख़त्म होना भी अन्य समाप्त व स्वीकार की गई कुरीतियाँ जैसे- सती प्रथा, बाल विवाह, विधवा विवाह, की तरह ही स्वीकार व स्वागत किया जाना चाहिए,
तीन तलाक़ समाज कि और कुरीतियों में से एक कुरीति थीं

 

 


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