गजल – आदित्य सठवारिया ‘सठ’

0 commentsViews:

images (1)

बरसों की बरसों मांग पे आकाश में बादल दिखे ।
दो बूँद जल के वास्ते सागर यहाँ प्यासे दिखे ।।

सारी उमर शैतान ने रह रह लहू अपना पिया ,

फिर भी नहीं मरने दिया इस बात के कायल दिखे ।।1 ।।

दिन रात मेहनत का सिला मजदूर को कैसा मिला ,

बच्चों के तन पर चीथड़े माँ के फटे आँचल दिखे ।।2।।

तुला थी उनके हाथ में जब चाहा डाड़ी मार दी ,

असहाय के भगवान भी बलवान के लायल दिखे ।।3।।

माला ने हर गणमान्य का हंस हंस यहाँ स्वागत किया ,

उसमे गुथे फूलों के दिल सुईं से ‘सठ’घायल दिखे ।।4।।

आदित्य सठवारिया ‘सठ’


Facebook Comments