लिप का साल – रेखा मोहन

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लिप का साल अधिवर्ष (Adhivarsh) लीप के साल को हिन्दी में लौद का साल भी कहा जाता है|लीप से मतलब रफ्तार को सही बनाए रखना और नियमित रखना भी है| लीप का साल हर चार साल बाद आता है| लीप के साल में दूसरे फरवरी महीने में एक फालतू दिन मिलाकर २८ की जगह २९ दिन कर दिए जाते हैं| साल के उस समय ३६६ दिन हो जाते हैं| बैसे तो साल में ३६५ दिन होते हैं पर धरती के सूरज के चक्कर के दोरान घूमने में जो समय का अन्तर पड जाता है, उसी की गणना को ठीक करने के लिये लीप का साल होता है| पृथ्वी को एक बार्षिक पूरा चक्कर में : 4,331.9 पृथ्बी दिनों में 11.86पृथ्बी सालों में गति से 11.86 गुना में 365 बराबर 4,328.9 लगभग से अधिक में 4As पृथ्वी में दिन बनते थे 365.25 ये सारे सालों में लीप साल थे उदाहरण के तौर पर नीचे लिखे सालों में लीप साल आते हैं, पूरे सालों की ये सारी २१ शताब्दी की लिस्ट है (साल 2001 to 2100): 2004, 2008, 2012, 2016, 2020, 2024, 2028, 2032, 2036, 2040, 2044, 2048, 2052, 2056, 2060, 2064, 2068, 2072, 2076, 2080, 2084, 2088, 2092, 2096. इससे पहले आखरी लीप दिन फरवरी 29, 2012 में था| पृथ्वी को एक बार्षिक पूरा चक्कर में : : 4,331.9 दिन में होता है और 11.86 पृथ्वी गति से साल में सूर्य के इर्दगिर्द 11.86 गुणा रफ्तार से 365 बराबर 4,328.9 समय ले लेती है इस प्रकार साल में तकरीबन लगभग पूरे ३६५ दिन के करीब हो जाता है|लीप बर्ष में पृथ्वी की गति और दिन अन्तर –11.86 गुणा रफ्तार से 365 बराबर 4,328.9 समय ले लेती है| इस प्रकार साल में तकरीबन लगभग पूरे ३६५ दिन के करीब हो जाता है| आगे कोई पूछे साल में कितने दिन होते है ,तो जवाब होगा एक साल में ३६५.२५ दिन ३ लीप दिनों को छोडकर और कुछ लोग ये भी मानते है कि जो जोडो ३१ ,३० कि बनी होती है उनकी शोभा या लय को खराब कर देता है | बड़ी बड़ी योजनाओं में भी इसके कारण कुछ बिलम्व सा बन जाता है |व्यापार के लिये इसको बढिया माना जाता है | इस बार २०१६ में भी लीप साल है ,आप क्या अनुभव करते हो अपने सरकारी खाते पूरे करते हुये जरा सोचो क्योकि २९ दिन का महीना है | लीप के साल से एक कहानी भी जुड़ी है | पहली शताब्दी में प्लिनी द एल्डर (Pliny the Elder) द्वारा कही एक प्राचीन कहानी के साथ भी जोड़ा जाता है| (एक उपसिद्धांत जो यह मानता है कि जूलियस सीजर ने स्वयं अपना नाम इस शल्य-क्रिया से रखा, इसे इस तथ्य द्वारा नकार दिया जाता है कि एक पूर्वज से व्युत्पन्न हुआ, जिसने सीज़ेरियन सेक्शन (शल्य प्रसव परिच्छेद) द्वारा जन्म लिया था, पर इसकी सच्चाई पर विवाद (जूलियस इटली में सीज़ेरियन सेक्शन की घटना) विशेष रूप से अधिक है, यद्यपि यह क्षेत्र के हिसाब से बदलता रहता है। इसी लिये प्रसव में तब से सीजर का इस्तेमाल किया जाने लगा| जन 2010 … एक अनुमान के अनुसार अकेले भारत में ही क़रीब 50 कैलेंडर (पंचांग) हैं और इनमें से कई का नया साल अलग दिनों पर होता है। एक जनवरी को प्रसिद्ध रोमन सम्राट जूलियस सीजर ने 47 ईसा पूर्व में इस कैलेंडर में परिवर्तन किया और इसमें जुलाई माह जोड़ा। … राष्ट्रीय संवत् का नववर्ष 22 मार्च को होता है जबकि लीप ईयर में यह 21 मार्च होता है| अडंमान-निकोबार के बाद भारत के पूर्वी द्वार बर्मा से अंग्रेजों को खदेड़कर वहाँ पर आज़ाद हिन्द सरकार का तिरंगा फहराने की ….. सुभाष जर्मनी के हिटलर,इटली के मुसोलिनी तथा जापान के प्रधानमंत्री तोजो से दीर्घ वार्ताएँ कर युध्दोपरांत भारत को स्वतंत्र करवाने की अपनी मनोभावना से .कुछ अलग मान्यता रखी। प्राचीन रोमन सीज़ेरियन सेक्शन का पहला प्रदर्शन एक मां की कोख से एक शिशु को निकालने के लिए लिए हुआ था, जो शिशु जन्म के दौरान ही मौत के आगोश में समा गई। सीज़र की मां- ऑरेलिया शिशु-जन्म के दौरान जीवित रही तथा अपने बच्चे को सफलापूर्वक जन्म दिया, जिससे यह संभावना को इन्कार कर दिया जाता है कि रोमन तानाशाह तथा सेनानायक ने सीज़ेरियन सेक्शन द्वारा जन्म लिया था। कैटालैन संत, रेमंड नॉटेटस (1204-1240), को उसका उपनाम लेटिन शब्द नॉन नेटस से मिला, जिसका अर्थ होता है, “अजन्मा”- क्योंकि उनका जन्म सीज़ेरियन सेक्शन द्वारा हुआ था। उनकी मां उन्हें जन्म देने के दौरान की मृत हो गई थी। वर्ष 1316 में स्कॉटलैंड का भावी रॉबर्ट- II सीज़ेरियन सेक्शन द्वारा जन्मा था- उसकी मां मार्जोरी ब्रूस उसी दौरान मृत हो गईं थीं। मैकडफ के लिए यह घटना शेक्सपीयर के नाटक मैकबेथकी प्रेरणा हो सकती है। इसके इलावा कुछ बच्चों का जन्म २९ फरवरी को होता है, उनको अपने जन्मदिन का चार साल इन्तजार करना पडता है| उनकी बढिया सेहत और सोच पर बहुत ही बढिया प्रभाव होता है, और उनके व्यबहार में कोई अलगाव नही होता| इन बच्चों में रूचि में ठहराव और काम की क्षमता दूसरे सामान्य बच्चों से कोई कम नही होती। सम्पति खरीदने वाले भी इसका भरपूर फायदा लेते हैं| रेखा मोहन

 


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