साहित्य संगीत कला विहीन – डॉ रुपाली दिलीप चौधरी

कला डॉ रुपाली दिलीप चौधरी डॉअन्नासाहेब जी डी विंडाले महिला महाविद्यालय जलगांव
साहित्य संगीत कला विहीन
साक्षात पशु पुच्छ विषाणु ही न
कला शब्द अत्यंत व्यापक है सदियों से कला जगत का अपना गौरवशाली इतिहास रहा है इतिहास के पन्ने यदि खोलते हैं तो अपने भारत का कला वैभव बिखरा हुआ दिखाई देता है कला वैभव बिखरा हुआ दिखाई देता है ठीक उसी तरह जैसे सामाजिक स्वरूप अनेक विविधताओं को समेटे यहां का गौरवशाली समाज सदियों की मानसिक गुलामी अराजकता के मध्य में भी अपनी कला का विकास कर पाए हैं। यह कला संगीत के रूप में उभरती है जो कलाकार गायन और वादन से स्वयं को ही नहीं श्रोताओं को भी अभिभूत कर देता है। संगीत के पश्चात विभिन्न भाव भंगिमा उसे युक्त हमारी संस्कृति व पौराणिक कथाओं को नृत्य जीवंतता प्रदान करते हैं। कला में कला पृष्ठ कला चित्रकला कहलाती है। अजंता की कलाकृतियां मधुबनी शैली मुगल शैली बंगाल शैली इसके साथ भारत की वास्तुकला मूर्तिकला इन सभी कलाओं के द्वारा हमारा लोकजीवन लोकमानस तथा जीवन का आंतरिक और आध्यात्मिक पक्ष में अभिव्यक्त होता है। कला साहित्य संस्कृति इसमें सुरभि विशेष देती है पुस्तक कला के माध्यम से मनुष्य अपनी आजीविका के नए उपादान ओं का निर्माण कर सकता है। वाद्य यंत्र वादन, एकल नृत्य ,एकल ,लोक गायन साहित्य निर्मिती ,पाक कला ,चित्रकला मंडला आर्ट ,शिल्प कला ,ज्वेलरी ,मास्क बनाना ,संगीत को आत्मसात करना काव्य रचना ,लघु कथा का निर्माण करना शॉर्ट फिल्म का निर्माण करना ,मैजिक प्ले को तैयार करना ,गार्डनिंग जैसी अनेकानेक प्रकार की कलाओं को हम विकसित कर सकते हैं।
सत्यम शिवम सुंदर
सत्य ही शिव है ,शिव ही सत्य है ,अतः यह दोनों भी सुंदर है । कला का निर्माण आज का नहीं है यह तो एक मनुष्य का अविष्कार है। वस्तुतः कला संस्कृति का मूल आधार है कला के कारण है मनुष्य के जीवन में एक नया निखार आया है मनुष्य को परिवर्तित करने के लिए मनुष्य में सुधार लाने के लिए केवल मात्र कला ही योगदान देती है। कला मनुष्य का ऐसा उपादान है जो मनुष्य को उसके जीवन को सवार देता है उसकी पीड़ा को दूर कर देता है। कला में वह ताकत है जो भूखे को अन्न दे सके पीड़ितों को सहारा दे सके जनमानस में प्यार को पढ़ पा सके। हमारी भारतीय संस्कृति हमारे भारतीय कला के कारण ही पौराणिक गौरवान्वित हुई है। उपर्युक्त दी गई कला में से यदि मनुष्य में चार कला भी विकसित हो जाए तो ऐसा व्यक्ति कभी भूखा पैसा नहीं रह सकता मतलब है कि हमारी कल आए मनुष्य को जीवन दान देती है मनुष्य को सवार देती है। कला है मनुष्य का नया अविष्कार,
देता सभी को उज्जवल और ढेर सारा प्यार ,
भूखा ना रहता कोई हर कोई करता सिंगार ,
कला है मनुष्य का जीता जागता उपहार।