जय जवान जय किसान – डॉ रुपाली दिलीप चौधर

डॉ.अन्नासाहेब जी.डी.बेंडाले महिला महाविद्यालय जलगांव
‘ धरती से तेरा अनोखा रिश्ता,
तुमने दिया स्थान पिता तथा माता!
बना दिया ऐसा अलग ही नाता,
धरती को समर्पित, सारा सच जय जवान जय किसान ही कहलाता!!!’
जय जवान जय किसान इस नारे को हम सब जानते हैं। सारा सच तो यह है कि 1965 में भारत-पाक युद्ध के दौरान लाल बहादुर शास्त्री जी ने यह नारा दिया था जब वह प्रधानमंत्री थे। जय जवान जय किसान इस नारे का सारा सच यह है कि सरहद पर खड़े जवान एवं खेत में काम करते किसान के अटूट मेहनत एवं श्रम को दर्शाता है। इन शब्दों को सुनते ही मन में जोश उत्साह आत्मविश्वास भर आता है और हर व्यक्ति परेशानियों का डटकर सामना कर सकता है इतनी शक्ति इन शब्दों में होती है। वास्तविक तौर पर देश का किसान अन्नदाता है । जो निस्वार्थ भाव से देश के तमाम जनता के लिए कार्य करता है हमारी थाली को सजाने वाला केवल किसान है। किसान है तो हमारे जीवन में पोषक तत्व है। स्वास्थ्य यदि उत्तम होता है तो मन भी तंदुरुस्त रहता है। सब के स्वास्थ्य की चिंता करने वाला किसान तनिक भी हो नहीं सोचता कि धूप है ,ठंड है ,या वर्षा है अपना कर्म नित नए ढंग से स्वीकार करता ही रहता है । जहां एक और धरती पर जीवन न्योछावर करने वाला किसान है तो दूसरी ओर मातृभूमि के लिए समस्त जीवन समर्पित अर्पित करने वाला हमारा देश का जवान है। जवान अपने भीतर लोग लालच मोह माया ममता नहीं रखता बल्कि वह अपने जीवन के साथ धरती के प्रति समर्पित हो जाता है। लड्डाक हो या हो कोई भी सरहद वह या नहीं चाहता कि हम बचे वह यह चाहता है कि मुझे और लोगों की जान बचाने है। उस जवान का धरती के प्रति प्रेम नीश्चल है अमर है। उसकी जवान के भी बच्चे हैं पत्नी है इसके बावजूद वह किसी भी बंधनों में बंधना नहीं चाहता अपने धरती के प्रति समर्पित होने वाले इन दोनों को जवान और किसान को हमारा प्रणाम।