किसान ही अन्नदाता – संध्या कुमारी

  1. *जिसकी वजह से जीते हैं वो किसान ही अन्नदाता है,
    लाख मुश्किलें झेल कर भी, हमारे पेट तक अनाज लाता है।

*दर्द से भरी तो जिंदगी उनकी है, जो अपना पेट मार के हमारा पेट भरता है,
धूप में नंगे पैर चलकर भी, सूखा पड़ने पर हमारे लिए वह मर जाता है।

*शहरों की गंदगी ने खेतों से हरियाली छीन ली,
फिर भी वह किसान भगवान के आगे हमारे लिए ही प्रार्थना करता है।

*असल मायने में वो ही हमारा अन्नदाता है ,जो हमारे लिए अनाज लाता है।

*सारा सच तो यह है कि लाख कर्जो के बाद भी वह मेहनत से उस खेत को बोता है,
मर मर कर खुद जीने के बाद भी, खेतों में बैल ना हो तो खुद बैल बनकर फसल बोता है।

*जिसने उस गर्मी में पसीना ना बहाया हो तो वह क्या समझेंगे उस मेहनत का मतलब,
अमीरी जिंदगी तो आराम से कट जाएगी,
लेकिन जब तक खुद नहीं उतरोगे उस तपती धूप में तो क्या जानोगे उस किसान का करतब।

*असल मायने में वो ही हमारा अन्नदाता है जो हमारे लिए अनाज लाता है।

*सारा सच यही है जो खुद खाली पेट सोकर सभी का पेट भरता है,
लाख मुसीबत होने पर भी वह सब कुछ हंस कर सह जाता है।

*बिना किसी शिकायत के वह हिम्मत बांधे रहता है,
*मेरा मानना तो यही है कि किसान ही सच्चा भारत का लाल कहलाता है।

*असल मायने में वो ही हमारा अन्नदाता है जो हमारे लिए अनाज लाता है।

नाम -संध्या
चंडीगढ़