SC के ऑर्डर का उल्लंघन: एंट्रेंस टेस्ट में किसी सब्जेक्ट में जीरो नंबर हैं तो भी बनेंगे SBI में क्लर्क

नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उल्लंघन करते हुए एसबीआई ऐसे कैंडिडेट्स को भी क्लर्क भर्ती करने जा रहा है जो क्वेश्चन पेपर के हर सेक्शन में मिनिमम मार्क्स के क्राइटेरिया को पूरा नहीं पाएंगे। मतलब भले ही किसी एक विषय में आपके शून्य अंक हों पर यदि अन्य विषयों के मार्क्स का एवरेज निकालकर आप पास हो जाते हैं तो आपको सिलेक्टेड मान लिया जाएगा। इसके लिए बैंक ने एग्जाम प्रोसेस में बदलाव तक कर दिया है।

कई बैंक एग्जाम में मिनिमम मार्क्स का नियम मौजूद

– अन्य बैंक परीक्षाओं में मिनिमम मार्क्स का नियम मौजूद है। हाल में हुई प्रोबेशनरी अफसर (पीओ) भर्ती में एसबीआई ने ऐसी गड़बड़ी की थी। अफसरों ने एग्जाम के ऐड में तो हर सेक्शन में मिनिमम मार्क्स की अनिवार्यता रखी, पर सिलेक्शन करते समय अचानक इसे दरकिनार कर दिया। हाईकोर्ट ने इसपर नाराजगी जताई और सुनवाई कर रहा है।

– सूत्रों की मानें तो बैंक ने कोर्ट की र्कारवाई से बचने के लिए व्यवस्था ही बदल दी है। हालांकि बैंक का कहना है कि उसे सही कैंडिडेट मिल नहीं रहे।

– वहीं, इस मामले में एसबीआई अधिकारियों ने बयान देने से मना कर दिया। एसबीआई चेयरमैन और एग्जाम की मॉनिटरिंग करने वाले विभाग को ईमेल भी किया गया। मगर कोई जवाब नहीं आया।

योग्य कैंडिडेट का हो सिलेक्शन: SC

– सुप्रीम कोर्ट 2011 में तय कर चुका है कि किसी भी परीक्षा में योग्य कैंडिडेट्स का ही सिलेक्शन किया जाना चाहिए।

– सुप्रीम कोर्ट के एडवोकेट जसवीर शेरगिल का कहना है कि यदि कोई व्यक्ति गणित या अन्य विषय में मिनिमम मार्क्स तक नहीं ला पाता तो वह योग्य कैसे हो सकता है। ऐसे में एसबीआई द्वारा मिनिमम क्वालिफाइंग मार्क्स हटाया जाना सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उल्लंघन है।