शारजहां की जेल में फांसी की सजा माफ

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(अमृतसर ) शारजहां की जेल में फांसी की सजा माफ होने के बाद भारत पहुंचे 17 युवक देर शाम करीब साढ़े आठ बजे सचखंड श्री हरमंदिर साहिब में नतमस्तक होने पहुंचे। युवकों के सचखंड श्री हरमंदिर साहिब मेंपहुंचने पर आस्था के साथ-साथ भावना का भी सैलाब उमड़ पड़ा। अपने लाडलों को जिंदा वापस लौटते देख उनके परिजनों की आंखों से आंसू छलक आए। सभी युवकों के पारिवारिक सदस्यों ने अपने लाडलों को मौत के मुंह से बाहर निकाल कर भारत लाने वाले दुबई के व्यवयासी और समाज सेवक एसपी सिंह ओबराय का कोटि-कोटि धन्यवाद किया। इस मौके पर एसपी सिंह के चेहरे पर भी इन सभी युवकों को रिहा कराने के मकसद में कामयाब होने की खुशी साफ दिखाई दे रही थी। इन युवकों की रिहाई में कांग्रेस पार्टी के प्रधान कैप्टन अमरिंदर सिंह, पटियाला से कांग्रेसी सांसद और विदेश राज्य मंत्री महारानी परनीत कौर के साथ-साथ उन्होंने सांसद सुखदेव सिंह ढींढसा का भी धन्यवाद किया औरकहा कि इनके सहयोग के बिना इस नेक काम को अंजाम तक पहुंचाना मुमकिन नहीं था। हालांकि इस दौरान उन्होंने यह भी कहा कि पंजाब सरकार चाह कर भी इस मामले में कोई मदद नहीं कर सकती थी
करीब चार वर्षों तक फांसी की सजा का फरमान सुन कर रोज थोड़ा-थोड़ा मर रहे 17 भारतीय युवक आखिरकार अपने वतन लौट ही आए। दिल्ली एयरपोर्ट से सुबह दुबई के व्यवसायी और समाज सेवकएसपी सिंह ओबराय के साथ सड़क के रास्ते ये सभी युवक सीधे सचखंड श्री हरमंदिर साहिब में नतमस्तक होने के लिए पहुंचे। जहां एसजीपीसी की ओर से सभी का स्वागत किया और सिरोपा भेंट कर सम्मानित किया गया। युवकों के सचखंड श्री हरमंदिर साहिब में पहुंचते ही आस्था के केंद्रमें जहां आस्था का सैलाब अविरल बह रहा था, वहां भावना का भी सैलाब उमड़ पड़ा। युवकों के पारिवारिक सदस्यों ने अपने लाडलों को गलवख्ड़ी में ले लिया। जैसे ही ये युवक अपने मां के गले लगे, तो मां-बेटे के कलेजों को मिल रही ठंडक उनके चेहरों से साफ दिखाई दे रही थी। एसपी सिंह ओबराय के प्रयासों से रिहा होकर वापस लौटे इन युवकों का कहना है कि जब उन्हें फांसी की सजा सुनाई गई, तो उन्होंने जिंदगी में दोबारा अपने परिजनों से मिलने की उम्मीद ही छोड़ दी थी। उन्होंने कहा कि पहले वे ट्रैवल एजेंटों के झांसे में आकर ब्याज पर पैसे उठा कर दुबई गए। जहां उन्हें पता चला कि वादे के मुताबिक उन्हें न तो नौकरी दिलाई गई है और न ही उन्हें सैलरी ही मिल रही थी। जिसके चलते उन्होंने कंपनी का काम छोड़ कर बाहर अपना कारोबार शुरू कर दिया। लेकिन इस बीच हुए झगड़े में उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया और आखिरकार उन्हें मौत की सजा सुना दी गई। उन्होंने कहा कि जब एसपी सिंह ओबराय उनसे मिलने के लिए सुखदेव सिंह ढींढसा के साथ आए, तो उन्हें आशा की किरण दिखाई दी और आखिरकार वे रिहा होकर वापस लौट आए हैं। इन सभी ने कहा कि वे एसपी सिंह ओबराय का एहसान रहते
इस संबंध में दुबई के व्यवसायी एसपी सिंह ओबराय ने बताया कि जब उन्होंने इस केस के बारे में सुना, तो उनके मन में काफी दुख हुआ था। उन्होंने कहा कि इसके बाद कई तरह के उतार-चढ़ाव इस केस में आए। लेकिन वह युवकों को रिहा कराने के लिए उन्होंने रात-दिन एक कर दिया। उन्होंने बताया कि युवकों की रिहाई कैप्टन अमरिंदर सिंह के बिना संभव ही नहीं थी। क्योंकि उन्होंने पाकिस्तानी नागरिक मिश्री खां के परिजनों के साथ संपर्क कर इस मुहिम का रास्ता साफ कराया। इसके बाद सांसद महारानी परनीत कौर ने भारत सरकार के सहयोग से शारजहां में वकीलों का पैनल बनवाया, जिसने इस केस आगे बढ़ाया। उन्होंने बताया कि इस केस में सांसद सुखदेव सिंह ढींढसा ने भी उन्हें भरपूर सहयोग दिया। उन्होंने बताया कि इस केस में केंद्र या पंजाब सरकार चाह कर भी कोई आर्थिक मदद नहीं कर सकती थी। क्योंकि सरकार ब्लड मनी नहीं दे सकती है।

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