नशामुक्त सर्वश्रेष्ठ भारत

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रेडियो पर अपने तीसरे ‘मन की बात‘ कार्यक्रम
में युवा पीढी को अपने आगोश में लेने वाली नशे की लत के बारे में अपनी
चिंता जाहिर करते हुए, एक भारत: नशा मुक्त सर्वश्रष्ठ भारत बनाने का
आह्वान किया। प्रधानमंत्री की यह चिंता और संकल्प स्वाभाविक हैं, क्योंकि
नशा की आदत विशेषतः युवावर्ग को अंधकार, बर्बादी और विनाश का
कोपभाजन बनाती हैं। लेकिन क्या इसके लिए सीधे-सीधे सरकार और हम
जिम्मेदार नहीं हैं ? सरकारी आंकडों पर ही नजर डालें तो
देश में नशाखोरी के खिलाफ की जाने वाली कार्यवाही
नाकाफी दिखाई देती हैं। आखिर सरकारी तंत्र, हमारे
हुक्मरान और हम क्यों अपने दायित्व का निर्वहन नहीं करते
? प्रतिकूल किस तरह देश में नशे के सौदागर अपना काम
आसानी से करते चले जा रहे हैं, परिणामस्वरूप युवाओं का
भविष्य बदहवासी, भयावह और नेस्तनाबूत होता जा रहा हैं।
गौरतलब है प्राचीन काल से भारत वर्ष में नशा किया जाता रहा हैं, नशा करने
वाले होंगे तो स्वाभाविक रूप से नशे के कारोबारियों की भी चांदी होंगी। ऐसे
में विगत पांच-छह दशकों में बडी तेजी से नशा माफियों ने हिन्दुस्तान की
सरजमें पर अपने पैर जमाए हैं, हालात बेहद नासाज है। युवा वर्ग नशाखोरी
के शिकारी बनते चले जा रहे हैं और इसका सौदा करने वाले मालामाल होते
जा रहे हैं। वैसे हमारे देश में पारंपरिक रूप से शराब, अफीम और उससे जुडे
भांग, गांजा, हशीश का उपयोग किया जाता रहा हैं। कुछ राज्यों में तो कानूनी
रूप से इनकी दुकानों को मान्यता मिली हुई हैं। एक ओर गांजा, अफीम तो
दूसरी ओर एलएसडी, हेरोइन, कोकीन समेत अन्य केमिकल से बनने वाली
गोलियां का जंजाल बडी तेजी से देश में फैला हैं। वर्ष 2013 में जारी
नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो की रपट पर नजर डाली जाए तो साफ हो जाता
हैं कि कितनी तेजी से यह बला हमारे देश को अपने नियंत्रण में लेने की जुगत
भिडा रही हैं। सरकारी आंकडों के अनुसार सन् 2013 में ही 2333 किलो
अफीम, 1450 किलो हेरोइन, 91792 किलो गांजा, 4407 किलो हशीश, 47
किलो कोकीन, 6655 किलो एफिड्रिन तथा 243 किलो एसीटिक एनहाईड्राइड
विभिन्न एजेंसियों की कार्यवाही में बरामद की गई। इतना ही नहीं विभिन्न
एजेंसियों ने 2139.84 एकड में अवैध रूप से की जा रही अफीम और 2524
एकड में फैली गांजे की खेती को नष्ट किया। लिहाजा भारत दुनिया का ऐसा
देश है जहां कानुनन अफीम का उत्पादन होता हैं।
बहराल नशामुक्ति के अभिप्राय सजा और जुर्म का उल्लेख किया जाये तो
देश में लाइसेंस के बिना अफीम या भांग की खेती करना 10 साल की सजा।
किसान को धोखा देकर अफीम खरीदना 10 से 20 साल की कैद एवं एक से
दो लाख का जुर्माना। नशीले पदार्थो का धंधा करने वाले की धन से मदद करना
या शरण देना 10 से 20 साल की कैद और एक से दो लाख रूपए जुर्माना।
नशीले पदार्थ का सेवन कोकीन तथा हेरोइन के सेवन पर एक साल तक कैद
और 20 हजार रूपए तक का जुर्माना। अन्य नशीले पदार्थो के सेवन पर छह
माह की कैद और दस हजार रूपए जुर्माना का प्रचलित प्रावधान हैं।
अंततः नशा व्यसन, फैशन और शान नहीं वरन् विनाश का द्योतक हैं। देश
में बढती नशे की लत नौजवानों को महामारी की तरह अपनी चपेट में ले रही
हैं। आखिर! कब तक आम जनमानस को नशा से मुक्ति मिलेंगी। और कैसे
नशे के इस दानव को रोका जा सकेगा। यह अत्यंत गंभीर प्रश्न हमें
आहृलादित और झ्ांझ्ाकोरता हैं। पर्यन्त कदापि नशा मुक्त सर्वश्रष्ठ भारत का
अधिष्ठान नहीं हो पायेंगा। यथेष्ट प्रधानमंत्री के नशा मुक्त भारत अभियान के
आलाप का प्रलाप करते हुए हमें भी अपनी भागीदारी और जिम्मेदारी का
अनुपालन पूर्ण निष्ठा और लगन के साथ नशा मुक्ति और देश युक्ति के हित
में समर्पित करना होंगा। यथार्थ अंधकार, बर्बादी और तबाही से तिलाजंली
मिलेंगी।

 


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