महिलाओं के लिए जरुरी है कैल्शियम

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मेनोपॉज के समय और
मेनोपॉज के बाद शरीर
में बोन डेंसिटी को
बनाए रखने के लिए
जरूरी हॉर्मोन एस्ट्रोजन
का उत्पादन बेहद कम
हो जाता है। एस्ट्रोजन
हड्डियों में कैल्शियम
को जमा करने में मदद
करता है।

(फहमीना)
दिल, मांसपेशियों और तंत्रिकाओं
के सही तरीके से काम करने और खून
की क्लॉटिंग के लिए भी कैल्शियम की
जरूरत होती है? खासतौर पर
महिलाओं की शारीरिक जरूरतों के
मुताबिक जिसमें उन्हें गर्भावस्था,
स्तनपान और मेनोपॉज जैसी अवस्थाओं
से गुजरना पड़ता है, उम्र के हर पड़ाव
पर कैल्शियम की भरपूर मात्रा बेहद
जरूरी है।
समय रहते करें बचत
बचपन से लेकर किशोरावस्था तक
हड्डियां तेजी से बनती और विकसित
होती हैं और आने वाले समय के लिए
कैल्शियम को इकट्ठा करती हैं। आप
अपनी हड्डियों को युवा होने तक
कितना कैल्शियम देती हैं, यह इस
बात को तय करता है कि भविष्य में
आपकी हड्डियां कितनी मजबूत रहेंगी।
हमारे शरीर की आधी से ज्यादा हड्डियां
किशोरावस्था में बनती हैं, इसलिए जरूरी
है कि इस उम्र में भरपूर
मात्रा में अपने आहार में
कैल्शियम को शामिल किया
जाए। अगर शरीर को
जरूरी कैल्शियम की आपूर्ति
न मिले तो वह इकट्ठा
किए गए óोत यानी कि
हड्डियों से ही इसकी पूर्ति
करने लगता है। इसके
कारण भविष्य में हड्डियों
का घनत्व कम हो जाता है
और हड्डियों के भुरभुरा होने
की समस्या हो सकती है।
इससे प्रैक्चर होने का खतरा
भी बढ़ जाता है।
गर्भावस्था में बढ़ती
आवश्यकता
गर्भावस्था में बढ़ते शिशु
की जरूरतों के कारण खासतौर पर
कैल्शियम की आवश्यकता बढ़ जाती
है। साथ ही पूरे गर्भकाल में कैल्शियम
के अवशोषण में बदलाव होते रहते हैं,
जो कि इस समय में कैल्शियम की
जरूरत को बढ़ा देते हैं। शरीर की इन
आवश्यकताओं को देखते हुए गर्भवती
होने से पहले और गर्भावस्था के दौरान
कैल्शियम, आयरन और फॉलिक एसिड
से भरपूर संतुलित आहार लेना बेहद
जरूरी है। स्तनपान कराने वाली मांओं
को भी अपनी जरूरतों की पूर्ति के
लिए खासतौर पर अपने आहार में
कैल्शियम को शामिल करना चाहिए।
मेनोपॉज के दौरान
मेनोपॉज के दौर से गुजर रही
महिलाओं के लिए भी कैल्शियम बेहद
जरूरी है। मेनोपॉज के समय और
मेनोपॉज के बाद शरीर में बोन डेंसिटी
को बनाए रखने के लिए जरूरी हॉर्मोन
एस्ट्रोजन का उत्पादन बेहद कम हो
जाता है।
एस्ट्रोजन हड्डियों में कैल्शियम
को जमा करने में मदद करता है।
इसके कारण मेनोपोज वाली महिलाओं
में हड्डियों का घनत्व कम होने लगता
है और ओस्टियोपोरोसिस का खतरा
बढ़ जाता है। इस परेशानी से बचने के
लिए ज्यादा फाइबर और
कम वसा वाला खाना
खाएं, जिसमें कैल्शियम
और विटामिन डी भरपूर
मात्रा में शामिल हों।
कैल्शियम का
जोड़ीदार है विटामिन डी
कैल्शियम की
समुचित मात्रा लेने के बाद
भी कई बार शरीर को
उसका लाभ नहीं मिल
पाता। इसका मुख्य कारण
है, विटामिन डी की कमी।
कैल्शियम के पूरे लाभ के
लिए विटामिन डी बेहद
जरूरी है।
विटामिन डी, गुर्दों
और आंतों से कैल्शियम
के अवशोषण में मदद करता है। ऐसा
न हो पाने की स्थिति में यह शरीर से
अपशिष्ट के रूप में बाहर निकल जाता
है। इसलिए भले ही आप दूध, पनीर
आदि भरपूर मात्रा में लेती हों, आपको
उसका लाभ नहीं मिल पाता।
जब हो लैक्टोज से एलर्जी
दूध और दूध से बने उत्पादों को
कैल्शियम का सबसे अच्छा óोत माना
जाता है। लेकिन अगर आप ऐसे लोगों
की श्रेणी में आती हैं, जिन्हें दूध और
दूध से बने प्रोडक्ट से एलर्जी है तो
कैल्शियम को अपने आहार में शामिल
करने के अन्य भी कई óोत आपके
लिए उपलब्ध हैं। इसके लिए
फोर्टिफाइड सोया मिल्क, फोर्टिफाइड
जूस या लैक्टोज प्री मिल्क लें। इसके
अतिरिव्त डेयरी उत्पाद लेने से पहले
आप लैक्टोज एंजाइम टैबलेट भी ले
सकती हैं, जिससे आप दूध आसानी से
पचा लेंगी।
ऐसे करें शामिल
नाश्ते में दूध के साथ कोई अनाज
लें। एक कप दूध या दही में फल
मिलाकर स्वादिष्ट और हेल्दी स्मूदी
बनाएं।
लंच में एक कटोरी दही नियमित
रूप से लें।
सैंडविच में चीज स्लाइस लगाकर
खाएं, स्वाद और कैल्शियम दोनों बढ़
जाएंगे।
सब्जियों में फलियों को शामिल
करें।
मीठे की जगह दूध या दही की
पुडिंग ले सकती हैं।
ये लें सप्लीमेंट
कैल्शियम की जरूरत को पूरा करने
के लिए सबसे बेहतर कि अपनी डाइट
में कैल्शियम से भरपूर खाद्य पदार्थों
और पेय जैसे दूध, दही, पनीर, ब्रोकली,
बादाम, टोफू, सालमन मछली, फलों
के जूस, तिल आदि को शामिल किया
जाए। यदि इनसे समुचित मात्रा की
पूर्ति न हो पाए तो आप कैल्शियम
सप्लीमेंट से इसकी पूर्ति कर सकती
हैं। पर, इन्हें लेते समय कुछ बातों को
ध्यान में रखना जरूरी है। गर्भधारण
करने से पहले या उसके बाद शुरुआती
कुछ माह आपको जो भी दवाएं खाने
की सलाह दी जाएंगी (प्रीनेटल
विटामिन) उससे लगभग 150-200
मा कैल्शियम मिलता है।
इसके साथ अगर आप अतिरिव्त
कैल्शियम सप्लीमेंट ले रही हैं तो उसे
दिन में किसी अन्य समय लें, क्योंकि
हमारा शरीर एक समय में केवल 500
मा कैल्शियम ही अवशोषित कर पाता
है। ऐसे सप्लीमेंट्स बेहतर हैं, जिनमें
कैल्शियम के साथ विटामिन डी भी
शामिल हों।
अपनी जरूरत के अनुरूप सही
सप्लीमेंट लेने के लिए चिकित्सक की
सलाह जरूर लें। कुछ कैल्शियम
सप्लीमेंट्स में थोड़ी मात्रा में लेड होता
है, जो आपके गर्भ में विकसित होते
शिशु के लिए हानिकारक होता है।
इसलिए ऐसी टैबलेट्स लें, जो
लेड-प्री हों।

 


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