बिहार में करें धर्म और अध्यात्म का दर्शन

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बिहार हमेशा से ही धर्म, अध्यात्म,
संस्.ति और ऐतिहासिक धरोहर का केंद्र
रहा है। यहां की परंपराएं, संस्कृति,
रीति-रिवाज और जीवन-पद्धतियां, मेले,
पर्व, त्यौहार सभी देश-विदेश के पर्यटकों
को अपनी ओर खींचने का काम करते
हैं। अविकसित राज्य होने के बावजूद
भी बिहार को ग्रामीण पर्यटन के लिए
एक अलग ही दर्जा प्राप्त है। यहां के
धार्मिक और सांस्कृतिक स्थल पर्यटकों
के लिए एक खास आकर्षण होते हैं।
आइए इन्हीं के बारे में चर्चा करते हैं।
बिहार वह जगह है जहां से भगवान
गौतम बुद्ध ने ज्ञान और बुद्धत्व के
लिए अपनी यात्रा शुरू की थी। यहां
का बोधगया स्थल बिहार और पूरे देश
के सबसे महत्वपूर्ण बौद्ध तीर्थस्थलों में
से एक है। बोधगया के दर्शनीय स्थलों
में महाबोधि मंदिर, पीपल वृक्ष,
अनिमेषलोचन चौत्य, चंक्तमण, रत्नाकार,
मुचलिन्द सरोवर, तिब्बती मंदिर, चीन
का मंदिर, जापानी मंदिर, थाई मंदिर,
भूटान का मंदिर, पुरातात्विक संग्रहालय
दर्शनीय हैं।
अन्य महत्वपूर्ण स्थलों में पश्चिम
चंपारण-जहां गौतम बुद्ध ने अपने पिता
के राज्य को त्यागा था। पूर्वी चंपारण-
जहां गौतम बुद्ध ने एक आश्रम में
ठहरकर अपने पहले अध्यात्मिक गुरु
से शिक्षा प्राप्त की। बोधगया आने वाले
पर्यटकों को राजगीर और वैशाली भी
जरूर जाना चाहिए। यह भी गौतम
बुद्ध के पसंदीदा जगहों में से एक है।
बौद्ध धर्म के बारे जिज्ञासा रखने वालों
को नालंदा और भागलपुर की भी यात्रा
करनी चाहिए। यह वह जगह हैं जहां
बौद्ध विश्वविद्यालय और संग्रहालय
स्थापित किए गए हैं।
बोधगया से 13 किलोमीटर की
दूरी पर स्थित गया हिन्दू तीर्थयात्रियों
के लिए काफी मशहूर है। यहां का
विष्णुपद मंदिर पर्यटकों के बीच काफी
लोकप्रिय है। कहा जाता है कि भगवान
विष्णु के पांव के निशान पर इस मंदिर
का निर्माण कराया गया है। हिंदू धर्म में
इस मंदिर को अहम स्थान प्राप्त है।
पितृपक्ष के अवसर पर यहां हजारों
श्रद्धालु पिंडदान के लिए जुटते हैं।
कहा जाता है कि पिंडदान करने से
पूर्वजों को मोक्ष मिल जाता है।
पुराणों के अनुसार भगवान राम
भी अपनी पत्नी सीता के साथ यहां
पिंडदान के लिए आए थे। जैन धर्म के
अनुयायिओं के लिए भी बिहार एक
पवित्र धार्मिक स्थल है। जैन धर्म के
24वें तीर्थकर वर्धमान महावीर या
महावीर का जन्म प्राचीन भारत के
वैशाली राच्य (बिहार) में हुआ था। जैन
धर्म के अनुयायिओं के लिए यहां का
पावापुरी एक पवित्र स्थल है। यहां
भगवान महावीर को परिनिर्वाण की प्राप्ति
हुई थी।
अगर आप वैशाली जा रहे हैं तो
जल मंदिर जाना मत भूलें। यह मंदिर
एक तालाब के बीचों-बीच बना हुआ
है। इस मंदिर में मुख्यि पूज्यनीय वस्तुश
भगवान महावीर की चरण पादुका है।
कहा जाता है कि यहीं पर भगवान
महावीर का अंतिम संस्काणर किया
गया था। वैशाली के अलावा जैनियों
के लिए राजगीर और नालंदा दोनों ही
महत्वपूर्ण स्थल है। वर्धमान महावीर ने
अपने जीवन के 14 साल इन दोनों
जगह पर बिताए थे। सिख धर्म के
दृष्टिकोण से भी बिहार राच्य का खास
महत्व है। बिहार की राजधानी पटना
सिख धर्म के 10वें गुरु, गुरु गोविंद
सिंह की जन्म स्थली रही है। यह
स्थान सिक्ख धर्मावलंबियों के लिए
बहुत पवित्र है। प्रसिद्ध तख्त श्री पटना
साहिब बिहार राज्य के पटना शहर में
स्थित एक गुरुद्वारा है। सिखों के लिए
हरमंदिर साहब पांच प्रमुख तख्तों में
से एक है। यहां गुरु गोविंद सिंह से
संबंधित अनेक प्रामाणिक वस्तु्एं रखी
हुई हैं।
हिंदू, बौद्ध, जैन, सिख के अलावा
इस्लाम धर्म में भी बिहार राच्य का
विशेष स्थान है। प्राचीन काल में मुगल
शासकों के लिए बिहार सत्ता का केंद्र
रहा है। बहुत से सूफी संतों के लिए
बिहार एक अलग ही अहमियत रखता
है। मनेर शरीफ एक प्रसिद्ध मुस्लिम
धार्मिक स्थान है, जो भारत के बिहार
राच्य में स्थित है। यह पटना के पश्चिम
में तीस किलोमीटर की दूरी पर राष्ट्रीय
राजमार्ग 30 पर स्थित है। माना जाता
है कि मनेर शरीफ स्थान पर ही सूफी
संत मखदूम दौलत ने वर्ष 1608 में
अंतिम सांस ली थी।