एक दुनिया गरीबों की और दूसरी …?

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अभी अभी भारतीय मीडिया ने इस बात का जश्न बहुत जोर शोर से मनाया
है कि भारत में अरब-खरब पतियों की संख्या दुनिया में अग्रणी हो गई है। यह
जश्न अभी चल ही रहा है कि एक रिपोर्ट आ गईजो बताती है कि भारत में
गरीबों की बड़ी संख्या अभी भी चौंकाने वाली है। संयुक्त राष्ट्र
संघ द्वारा जारी की गई रिपोर्ट के मुताबिक भारत में आज
भी लगभग 30 करोड़ लोग अत्यधिक गरीबी में जिंदगी
गुजारने को मजबूर हैं। मिलेनियम विकास लक्ष्य कार्यक्रम
की समय सीमा दिसम्बर में समाप्त हो जाएगी। इंडिया एण्ड
द एमजीडी की रिपोर्ट में बताया गया कि भारत में लगभग
30 करेड लोग गरीबी से पीडि़त हैं एवं उनके लिए शिक्षा, स्वास्थ्य, पानी, सफाई
प्रबंध एवं बिजली की सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं। भारत की आबादी 125 करेड
से अधिक है एवं लाखों लोगों को गरीबी, भूख, निरक्षरता एवं खराब स्वास्थ्य
से मुक्ति दिलाने भारत में संयुक्त राष्ट्र संघ के एमजीडी को अपनाया था। भारत
ने एमजीजीएम पर बड़ी प्रगति की है लेकिन फिलहाल संतुष्टि के लिए कोई
जगह नहीं है क्योंकि निर्धारित लक्ष्य एवं इसे हासिल करने के बीच संबंध में
अंतर है। भारत के पास स्थायी विकास में अग्रणी बनने का अवसर है देश ने
निःसंदेह गरीबी घटाने के लक्ष्य को हासिल किया है लेकिन प्रगति विषम है।
एमजीडी की समय सीमा समाप्त करने के बाद संयुक्त राष्ट्र एसडीजी कार्यक्रम
शुरू करेगा । वर्ष 1990 से अब तक भारत में गरीबी आधी कम हुई है। 2030
तक गरीबी को समाप्त करना भारत के लिए बड़ी चुनौती होगी।
यह रिपोर्ट अपनी जगह, लेकिन क्या सचमुच 1990ब की तुलना में भारत
में गरीबों की संख्या अभी तक आधी भी हो पायी है? भारत में तो जब तब गरीबी
की परिभाषा और पैमाने को ही लेकर बहस चलती रहती है। सरकार का पैमाना
अलग है, योजना आयोग का अलग। तो गरीबों की संख्या तय कैसे होगी?
यह तो हुई भारत में गरीबों की संख्या पर संयुक्त राष्ट्र की ताजी रिपोर्ट की
बात लेकिन जो संयुक्त राष्ट्र कुछ ताकतों की कठपुतली बन कर रह गया है।
उसकी योजनाओं और कार्यक्रमों का क्या अर्थ है ? यहां तो दुनिया के देशों
की सरकारों को बनाने बिगाड़ने की क्षमता रखने वाली ताकतों की गोपनीय
योजनाओं ने यू- टयूब और सोशल मीडिया पर तहलका मचा रखा है। ये ताकत
जिनमें 150 खरबपतियों ने एल्ययूमिनिटीगिरोह बना रखा है दुनिया भर के गरीबों
को मौत की नींद सुला देने की साजिश रच रही है। वह 700 करोड़ की आबादी
में से 650ब करोड़ लोगों का अस्तित्व समाप्त कर देने के तरीकें की खोजबीन
में जुटी है। अगर उसकी साजिशें कामयाब हो गईं, जो कि कभी नहीं होंगी
तो, उनकी दुनिया में सिर्फ 50 करोड़ लोग जिन्दा बचेंगे और वे भी गुलाम होंगे।
जबकि ये 150 अरबपति शासक बन कर ऐसी दुनिया पर राज करेंगे जिसमें
गरीब नहीं होंगे। जागरूक एन जी ओ इस साजिश के खिलाफ मशालें ले कर
चल पड़े हैं। जरूरी है कि आम आदमी उनके साथ लामबंद हो और इन पिपासु
तथा लोलुप खरबपतियों को बतायें कि उन्हें भी आखिरी समय सिर्फ दो गज
जमीन चाहिए – दफन के लिये ! इन रक्त पिपासुओं को यह एहसास कराया
जाना जरूरी है कि उनकी कल्पना की दुनिया कभी नहीं बनेगी और वक्त उन्हें
वहीं पहुँचा देगा, जहां सबको अंततः जाना पड़ता है।

 


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