त्रिवेणी

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1

चातक-चकोर को मदमस्त होते भी सुना है !
ज्वार-भाटे को उसे देख उफनते भी देखा है !
यूँ ही नहीं होता माशूकों को चाँद होने का गुमाँ !!

2

रब एक पलड़े पर ढेर सारे गम रख देता है !
दूसरे पलड़े पर छोटी सी ख़ुशी रख देता है !
महिमा तुलसी के पत्ते के समान हुई !!

3

टोकने वाले बहुत मिले राहों के गलियारों में !
जिन्हें गुमान था कि वही सयाने हैं टोली में !
कामयाबी पर होड़ में खड़े दे रहे बधाई मुझे !!
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हाइकु

साथ हमारे
विध्वंस या निर्माण
गुरु के हाथ।

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अट्टा तो बने
खिड़कियाँ खो दिए
रश्मि हवा भी

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