साम्प्रादायिक ताकतों का जवाब सिर्फ जनता ही दे सकती हैः फहीम सिददीकी

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लखनऊ, 23 जनवरी। नागरिक अधिकार परिशद के अध्यक्ष रफी अहमद ने सामाजिक संगठनों का अपने कार्यालय में किया स्वागत जिसमें मुख्य रूप से राश्ट्रीय भागीदारी आन्दोलन के अध्यक्ष पी0सी0 कूरील, जनहित संघर्श मोर्चा के अध्यक्ष हाजी मुहम्मद फहीम सिद्दीकी, सामाजिक कार्यकर्ता हम्माद अषरफ एवं मुहम्मद आफ़ाक आदि लोगों का स्वागत करते हुए कहा कि आज जो राश्ट्रीय भागीदारी आन्दोलन अपने सहयोगियों के साथ साम्प्रदायिक ताकतों एवं भ्रश्टाचारियों को लगातार जो जवाब देने का कार्य कर रही है वह देषहित एवं जनहित के लिए बहुत जरूरी है। राश्ट्रीय भागीदारी आन्दोलन के अध्यक्ष पी0सी0 कूरील ने कहाकि जिस तरह से सम्पूर्ण भारत असहिश्णुता का माहौल बी0जे0पी0 के आते ही आर0एस0एस0 के इषारे पर बना है, अगर इस ताकत को न रोका गया तो दलित 50 वर्श पूर्व की दषा में चला जायेगा, मुसलमान तो हमेषा स्वाभिमान की जिन्दगी जिया है उसको कोई खास फर्क नहीं पढ़ने वाला मगर दलित 50 वर्श पूर्व जो पीछे जायेगा उसकी जिम्मेदारी केन्द्र व राज्य सरकारों पर ही जायेगी। मान्यवर कांषीराम जी ने बाबा साहेब के विचारों को जो आगे बढ़ाने का कार्य किया था उसका उल्टा मायावती ने करके दिखाया जो आज दलितों का हाल है उसकी जिम्मेदार भी मायावती हैं क्योंकि उन्होंने वोट लेने का तो कार्य किया मगर दलितों के लिए कोई सोच नहीं रखी। यदि दलित, पिछड़े व मुस्लिम एक न हुए तो यह 15 प्रतिषत वाले 85 प्रतिषत को दबा देंगे और देष में असहिश्णुता का माहौल और भी ज्यादा बदतर हो जायेगा। जनहित संघर्श मोर्चा के अध्यक्ष हाजी मुहम्मद फहीम सिद्दीकी ने जनता से अपील करते हुए कहा कि साम्प्रदायिक ताकतों को कोई अगर जवाब दे सकता है तो वह सिर्फ जनता ही दे सकती है, जो कि दिल्ली और बिहार के चुनाव में देखा गया।
वरिश्ठ सामाजिक कार्यकर्ता मुहम्मद आफ़ाक ने कहा कि अभी बीते हुए दिनों में आमिर खान व षाहरूख खान ने जो बात कही थी उनकी बात का विरोध इस तरह हुआ कि जैसे उन्होंने कोई बात संविधान के खिलाफ कह दी मगर वही बात करण जौहर ने कही तो भाजपा के प्रवक्ता यह कहते हैं कि हिन्दुस्तान में खुली आजादी है कोई भी बात कह सकता है। मुहम्मद आफ़ाक ने यह कहा कि उन प्रवक्ताओं को यह सोच लेना चाहिए कि देष अगर करण जौहर का है तो षाहरूख खान, आमिर खान, मुनव्वर राना जैसे साहित्यकारों का भी है और इस देष में खुली आजादी है अपने मन की बात कहने की। इसका भी खामियाजा इनको और राज्यों में चुनाव होने वाले हैं भारी हार देखकर सबक लेना पड़ेगा।
बैठक में मुख्य रूप से सामाजिक कार्यकर्ता हम्माद अषरफ, केदार नाथ, नाजिषुरूर्रहमान नगरामी, असजद मलिक, सुभाश मौर्या, बब्लू खान आदि लोग मौजूद रहे।