UIDAI ने कहा- गूगल और विदेशी स्मार्ट कार्ड कंपनियां Aadhaar को फ्लॉप करना चाहती हैं

Aadhaar कार्ड की नोडल एजेंसी UIDAI ने बेहद गंभीर आरोप लगाते हुए सुप्रीम कोर्ट में यह कहा है कि गूगल और विदेशी स्मार्ट कार्ड कंपनियों की लॉबी यह नहीं चाहती है कि भारत में Aadhaar व्यवस्था सफल हो.

आधार प्लेटफॉर्म को निजी कंपनियों को मुहैया कराने पर चल रही बहस के दौरान यूनीक आइडेंडिटी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (UIDAI) के वकील ने यह बात कही. UIDAI ने कहा कि निजी क्षेत्र अब ऐसे तमाम कार्यों में आ गया है, जहां पहले सिर्फ सार्वजनिक कंपनियां होती थीं.

UIDAI ने इस बात को सिरे से खारिज किया कि आधार डेटा का इस्तेमाल चुनाव नतीजों से छेड़छाड़ के लिए किया जा सकता है. यह आरोप असल में डेटा लीक में फंसी कंपनी कैम्ब्रिज एनालिटिका ने लगाया था. इस मामले की सुनवाई दीपक मिश्रा की अगुवाई वाली पांच जजों की खंडपीठ कर रही है.

UIDAI के वकील राकेश द्विवेदी ने कहा, ‘कृपया हमारी तुलना कैम्ब्रिज एनालिटिका से न करें. हम ऐसा कोई डेटा नहीं रखते जैसा कि फेसबुक‍ और गूगल रखते हैं. तमाम ऐसे व्यावसायिक हित हैं जो यह नहीं चाहते कि आधार सफल हो. स्मार्ट कार्ड यूरोप में जगह बना चुका है. यदि भारतीय प्रयोग सफल होता है तो स्मार्ट कार्ड यूरोपीय यूनियन में भी खतरे में पड़ जाएगा. सिंगापुर भी बायोमीट्रिक पहचान को अपना रहा है. गूगल और स्मार्ट कार्ड इंडस्ट्री यह नहीं चाहती हैं कि आधार सफल हो.’

उन्होंने कहा कि UIDAI को कोर्ट में अपने को साबित करने से कोई गुरेज नहीं है, क्योंकि यहां यदि हम सफल हुए तो लोग हम पर भरोसा करेंगे. हम लोगों का भरोसा जीतना चाहता है.

क्या हिटलर के दौर जैसा है आधार कार्ड

कुछ लोग आधार कार्ड की तुलना हिटलर के उस दौर से कर रहे हैं, जब लोगों की गणना की जाती थी. इस पर द्विवेदी ने कहा, ‘हम किसी की जाति या धर्म के आधार पर विवरण इकट्ठा नहीं करते. हिटलर ने असल में इस तरह के आंकड़े जुटाए थे कि कौन यहूदी है और कौन नहीं.’ हालांकि उन्होंने यह स्वीकार किया कि आधार सभी बीमारियों का कोई रामबाण इलाज जैसा नहीं है.