Ustad Bismillah Khan’s Birthday: गूगल ने बनाया डूडल, जवाहरलाल नेहरू के कहने पर लाल किले से बजाई शहनाई, जानें ये 7 बातें

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नई दिल्ली: उस्ताद बिस्मिल्लाह खान (Ustad Bismillah Khan) को भारत में शहनाई को पॉपुलर बनाने का श्रेय जाता है. Google ने उनकी इसी उपलब्धि को ध्यान में रखते हुए आज का Doodle बनाया है. गूगल ने Ustad Bismillah Khan’s 102nd Birthday टाइटल से अपना डूडल बनाया है और उस्ताद बिस्मिल्लाह खान की शहनाई बजाते हुए तस्वीर लगाई है. उस्ताद बिस्मिल्लाह खान का जन्म 21 मार्च, 1916 को बिहार के डुमरांव में हुआ था. उनके पिता भोजपुर के राजा के दरबारी संगीतकार थे. छह साल की उम्र में वे वाराणसी आ गए थे. उन्होंने यहां पर अपने अंकल से शहनाई की ट्रेनिंग ली. उस्ताद बिस्मिल्लाह खान के संगीत करियर को सम्मानित करते हुए भारत सरकार ने 2001 में भारत रत्न से सम्मानित किया. उस्ताद बिस्मिल्लाह खान, एम.एस. सुब्बलक्ष्मी और रवि शंकर के बाद यह सर्वोच्च नागरिक सम्मान पाने वाले तीसरे शास्त्रीय संगीतकार थे.

उस्ताद बिस्मिल्लाह खान के साथ बातों और मुलाकातों पर आधारित उनकी लोकप्रिय किताब ‘सुर की बारादरी’ है, जिसे यतींद्र मिश्र ने लिखा है और उनके जीवन के बारे में काफी दिलचस्प बातें शेयर की हैं.

आइए उस्ताद बिस्मिल्लाह की जिंदगी की इन 5 उपलब्धियों पर नजर डालते हैंः

1. 1947 में देश के आजाद होने पर पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू के लाल किला पर तिरंगा फहराने के बाद उस्ताद बिस्मिल्लाह खान ने देशवासियों को बधाई देने के लिए लाल किले से शहनाई बजाई .

2. 1992 में ईरान के तेहरान में एक बड़ा ऑडिटोरियम बनाया गया, जिसका नाम उस्ताद बिस्मिल्लाह खान के नाम पर रखा गया, ‘तालार मौसीकी उस्ताद बिस्मिल्लाह खान.’

3. उन्होंने कन्नड़ फिल्म में साउथ के सुपरस्टार राजकुमार के लिए शहनाई बजाई थी. यह फिल्म थी ‘शादी अपन्ना’ और यह ब्लॉकबस्टर रही थी.

4. उस्ताद बिस्मिल्लाह खान सत्यजीत राय की फिल्म ‘जलसाघर’ में नजर आए थे और 1959 की फिल्म ‘गूंज उठी शहनाई’ में शहनाई बजाई थी. हालांकि ‘रॉकस्टार’ फिल्म में भी उनकी शहनाई का इस्तेमाल किया गया था.

5. भारत के पहले गणतंत्र दिवस (26 जनवरी, 1950) के मौके पर उन्होंने लाल किले से राग कैफी की प्रस्तुति दी थी.

6. उस्ताद बिस्मिल्लाह खान का बचपन का नाम कमरूद्दीन खान बताया जाता है लेकिन खुद बिस्मिल्लाह खान के मुताबिक उनका नाम अमीरूद्दीन था.

7. 1997 में आजादी की 50वीं वर्षगांठ पर भारत सरकार के आमंत्रण पर उस्ताद बिस्मिल्लाह खान ने दूसबरी बार लाल किले के दीवाने-आम से शहनाई बजाई.


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