वर्ण पिरामिड

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हम ख़ुद की जिम्मेदारी ईमानदारी से निभा लें तो वही बहुत है

बलि का मीट
बिना लहसुन प्याज का पकता
दशहरा में शोर क्यों नहीं मचता

हिन्दुओं-बात हिन्दुओं को पचता

1

स्व
सरी
निश्छल
स्थिर होती
सींचती जीव
डूबा देती नाव
ज्यूँ उबाल में आती

2

हो
नाव
मोहक
जलयान
धारा की सखी
क्षुधा पूर्ति साध्य
जीविका मल्लाह की


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