प्यासी जल में सीपी

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 प्यासी जल में सीपी

भूल जाओ पुरानी बातें ……. माफ़ कर दो सबको ….. माफ़ करने वाला महान होता है …… सबके झुके सर देखो ….. बार बार बड़े भैया बोले जा रहे थे …..

बड़े भैया की बातें जैसे पुष्पा के कान सुन ही नहीं रहे थे …..

आयोजन था पुष्पा के 25 वें शादी की सालगिरह का …… ससुराल की तरफ से सभी जुटे थे …… सास ससुर देवर देवरानी ननद संग उनके बच्चे ….. मायके  से आने वाले केवल उसके बड़े भैया भाभी ही थे । बुलाना वो अपने पिता को भी चाहती थी लेकिन उसके पति ने बुलाने से इंकार कर दिया था क्यों कि …………..

नासूर बनी पुरानी बात , ख़ुशी के हर नई बात पर भारी पड़ जाती है न

सास को पुष्पा कभी पसंद नहीं आई ….. पसंद तो वो किसी को नहीं करती थी …. उन्हें केवल खुद से प्यार था और बेटों को अपने वश में रखने के लिए बहुओं के खिलाफ साजिश रचा करती थी …… बेटे भी कान के कच्चे , माँ पर आँख बन्द कर विश्वास करते थे ….. बिना सफाई का मौका दिए , बिना कोई जबाब मांगे अपनी पत्नियों की धुलाई करते

पुष्पा तब तक सब सहती रही जब तक उसका बेटा समझने लायक नहीं हुआ

फिर धीरे धीरे विरोध जताना शुरू किया  लेकिन शादी का सालगिरह क्यों मनाये खुद को समझा नहीं पा रही थी

घर छोड़ चली गई होती तब जब बार बार निकाली गई थी तो……….

बुजुर्ग से बदला कभी नहीं लिया ……लेकिन सोचती रही बुढ़ापा तब दिखलाई नहीं दिया था क्यों

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दमाद बेटी को खुश रखे

बेटा श्रवण पूत बने

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जिस घर में बेटी हो बेटा ना हो

बेटा भ्रूण की हत्या करें

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जिस घर में बेटा हो , बेटी ना हो

बेटी भ्रूण की हत्या करें

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अरे नहीं रे

छोटा परिवार सुखी परिवार

हम दो हमारे एक की रीत निभायें

पहली सन्तान जो हो वो रहे बस

सारा फसाद एक घर में दोनों होना ही है

दमाद घर जमाई बन बेटे का धर्म निभाये

बेटी माँ बाप का ज्यादा ख्याल रखती हैं न

श्रवण पूत अल्पायु था कुँवारा बेचारा

सारा टँटा बहुयें से ही तो है

झगड़ा – फसाद के जड़ को ही खत्म करते हैं

बहु के अस्तित्व को ही मिटा देते हैं

बेटे के माँ बाप काशी वास करें

ना रहेगा बांस ना बजेगी बाँसुरी

ननद भौजाई भी नहीं बचेगी

ह न त


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