बस चार दिन

vibha
चार दिन की चाँदनी फिर अंधेरी रात की जगह
चारो दिन ,आठों पहर ,स्याह दिन ,कपाती रहती रूह
बस चार दिन
बस चार दिन
चार दिन पहले शोक-संताप
परसो आक्रोश-भड़ास
कल संकोच-सन्नाटा
आज सम्पूर्ण-शांति
बस चार दिन
बस चार दिन
फिर
इंतजार
फिर
एक घटना के लिए
बस चार दिन
बस चार दिन
चारो घड़ी आठों पहर
बस जीतने चाहो
गले फाड़ लो
बस जीतने चाहो
मोमबत्तियाँ जला लो
बस जीतने चाहो
शब्द उढेल लो
बस जीतने चाहो
कागज़ काला लो
फायदा व्यापारियों को भले हो
किसी और का भला हो
ऐसा हो नहीं सकता
हो ही नहीं सकता
चौथा हो चूका है
उसके जमीर का
जो कुछ कर सकता है
वो जानता है
ये उबाल भी है ,
बस चार दिन का ………..
विभा रानी श्रीवास्तव
Patna