जीवन का आधार है अधिगम – विकाश सक्सेना

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अधिगम का अर्थ है – सीखना। मनुष्य अपने जीवनकाल में बहुत-सी बातें सीखता है। अपने आस-पास के परिवेश और अपनी दैनिक दिनचर्या के अनुरूप वह अधिगम कर उस अधिगम को अपने व्यवहारिक तरीके से और अपनी सोच की निर्भरता के आधार पर उस अधिगम का सद्पयोग और दुरपयोग करता है।
सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ने के लिए मानव सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाते हुए आगे बढ़ता है तो परिणाम भी सकारात्मक होता है किंतु ठीक इसके विपरीत यदि वह नकारात्मकता को अपनाता है तो ज़ाहिर है कि परिणाम भी नकारात्मक ही प्राप्त होगा।
यह हमारी सोच पर निर्भर है कि हम किस तरह के समाज की कल्पना करते है, हम किसी विषय पर अपने किस तरह के विचार प्रकट करते हैं?
सही मायनों में हम कह सकते हैं कि हम सीख तो बहुत अधिक लेते हैं किंतु सही और गलत का फ़र्क़ सिर्फ हमारी सोच पर निर्भर करता है, हमारे व्यवहार पर निर्भर करता है।
उत्तर प्रदेश के जिला कासगंज पटियाली में आर.बी.एस. महाविद्यालय में अध्ययन कर रहे  डी. एल. एड. प्रथम सेमेस्टर के छात्र विकाश सक्सेना अपने अध्ययन के आधार पर बताते हैं कि “व्यक्ति को हमेशा अधिगम की प्रक्रिया को जीवित रखना चाहिए क्योंकि अधिगम को अपने अंदर जीवित रखने वाला व्यक्ति सदा सक्रिय रहता है और अपने अंदर रचनात्मक और कलात्मक गुणों को विकसित कर लेता है।”
अधिगम की तुलना हम परिवर्तन, सुधार और उन्नति से कर सकते हैं।
अधिगम से ही व्यक्ति में और भी विशेष परिवर्तन जैसे व्यक्ति की सोच में परिवर्तन, चिंतन में परिवर्तन, व्यक्ति के व्यवहार में परिवर्तन, उसकी रचनात्मकता में परिवर्तन आदि परिवर्तन होते है।
अतः संछेप में हम पाते है, कि व्यक्ति को हमेशा अपने अधिगम की क्रिया को अपने अंदर जीवित रखना चाहिए साथ ही उस अधिगम का उपयोग सकारात्मक दिशा में सकारात्मक सोच के साथ अपने और दूसरों के विकास के लिए करना चाहिए।
-विकाश सक्सेना, छात्र( डी.एल.एड). आर.बी.एस. महाविद्यालय,पटियाली(कासगंज), उत्तर प्रदेश

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