नहीं बनी सरहिंद नहर पुल की प्रोटेक्शन वाल

 

 

 

 

 

 

 

 

रूपनगर के नेहरू स्टेडियम के पास सरहिंद नहर पर बने पुल की प्रोटक्शन वाल का न होना किसी वक्त भी हादसे का कारण बन सकता है, जबकि संबंधित विभाग आंखे मूंदे बैठा है। हैरानी तो इस बात की है कि उक्त पुल अति व्यस्त पुलों की श्रेणी में आता है, बावजूद इसके प्रोटेक्शन वाल के निर्माण में हो रही देरी कई सवाल पैदा करती है। पुल कब हुआ था क्षतिग्रस्त उल्लेखनीय है कि गत 24 अगस्त वाले दिन पड़ रही बारिश के दौरान इस पुल की एक साइड खतरनाक ढ़ंग से नहर में धंस गई थी। हालांकि उस वक्त कोई हादसा नहीं हुआ, क्योंकि जिला प्रशासन तथा संबंधित विभाग तुरंत हरकत में आ गया था। जबकि ट्रैफिक को कंट्रोल करने के लिए ट्रैफिक पुलिस ने भी मोर्चा संभाल लिया था। इस घटना के तुरंत बाद पीडब्लयूडी, नेशनल हाईवे विभाग ने पुल के धंसे हिस्से की नींव को बड़े बड़े पत्थरों के स्ट्ड लगा कर शेष पुल को क्षतिग्रस्त होने से बचा लिया था, क्योंकि पानी के तेज बहाव में अगर जरा सी भी देरी की जाती तो पूरा पुल धंस सकता था। ऐसे में कोई दर्दनाक हादसा भी हो सकता था। उस वक्त विभाग ने पुल की नींव को तो सुरक्षित कर दिया गया था, लेकिन बारिश रुकने के बाद पुल की प्रोटेक्शन वाल नहीं बनाई गई, जबकि इस पुल पर प्रोटेक्शन वाल का न होना बड़े खतरे की घण्टी है। क्या कहते हैं विभाग के एक्सईएन इस बारे विभाग के एक्सइएन करनैल सिंह ने माना कि प्रोटेक्शन वाल का न बनना बड़े खतरे का कारण है। उन्होंने कहा कि इसके लिए उनके पास फण्ड ही नहीं है। इसके लिए पूरा प्रोजेक्ट बनाकर सरकार को भेजा गया था, लेकिन अभी तक फण्ड नहीं भेजा गया है। उनके अनुसार इसको बनाने के लिए मात्र पांच लाख रुपये की जरूरत है। पुल की बनाई गई नींव पर विभाग द्वारा जो खर्च किया गया है उसका पैसा भी सरकार ने अभी तक जारी नहीं किया है। क्या है पुल की अहमियत इस पुल की अहमियत की अगर बात करें तो उक्त पुल दिल्ली व चंडीगढ़ की दिशा से नवांशहर, जालंधर, अमृतसर व जे एण्ड के की दिशा में आने जाने वाले ट्रैफिक के सरहिंद नहर के आर पार जाने का एक मात्र साधन है। यानी इस पुल पर पूरे दिन हल्के व भारी वाहनों की भीड़ लगी रहती है, जबकि पुल की चौड़ाई भी वाहनों की संख्या की तुलना में काफी कम है। ऐसे मे प्रोटेक्शन वाल का न होना किसी वक्त भी हादसे का कारण बन सकता है। हैरानी तो इस बात की है कि इसी पुल से रोजाना वीआईपी लोगों की दर्जनों गाड़ियां गुजरती रहती हैं। फिर भी इस अहम प्रोटेक्शन वाल की जरूरत की ओर ध्यान नहीं दिया जा रहा है।

Piyush Taneja