
नर समान देखो नारी भी
संसार रूपी गाड़ी है खेती
परिश्रम रूपी अपनी सेवा से
आँगन बगिया स्त्री है खिलाती
घर की चार देखो वो दीवारी
आनंद वाटिका सी महकाती
जँहा जँहा वो कर है घुमाये
वही खुद स्त्री धन लक्ष्मी बसाती
घर लागे है घर सा वो स्त्री से ही
वो सुख सौभाग्य है पनपाती
सुख के लिए वो सभी के ही
रवि संग बनी घड़ी सी जगजाती
माँ बहन वही है बीवी भी
देवी रूप में पूजे है सारे
तनूजा रूपी इस स्त्री की
दया क्षमा,ममतारूपी छवि है सारे