डॉ. मोहिनी गुप्ता को ‘मातृभाषा रत्न’ मानद उपाधि – नेपाल में लहराया परचम, बढ़ाया भारत का गौरव

शब्द प्रतिभा बहुक्षेत्रीय सम्मान फाउंडेशन नेपाल द्वारा अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस (21 फ़रवरी 2026) के पावन अवसर पर मोहिनी गुप्ता को “मातृभाषा रत्न” मानद उपाधि से सम्मानित किया गया। यह सम्मान मातृभाषा हिंदी के संरक्षण, संवर्धन एवं साहित्यिक उन्नयन में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए प्रदान किया गया है।
फाउंडेशन के अध्यक्ष आनन्द गिरि मायालु ने लुंबिनी-5, नेपाल से जारी प्रशस्ति पत्र में कहा कि मोहिनी गुप्ता की साहित्य साधना, समर्पण और सृजनशीलता भावी पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत है। एक साहित्यकार, शिक्षिका और समाजसेवी के रूप में वे निरंतर हिंदी भाषा के प्रचार-प्रसार और सांस्कृतिक मूल्यों के संरक्षण में सक्रिय हैं।
यह सम्मान न केवल उनके व्यक्तिगत कृतित्व का गौरव है, बल्कि राजगढ़ (ब्यावरा) और समूचे हिंदी साहित्य जगत के लिए भी गर्व का विषय है। उनकी उपलब्धि से क्षेत्र में साहित्यिक चेतना को नई ऊर्जा और प्रोत्साहन मिला है।
मोहिनी गुप्ता राजस्थान की सांस्कृतिक नगरी कोटा में जन्मी और वर्तमान में राजगढ़ (ब्यावरा) में निवासरत मोहिनी गुप्ता साहित्य और समाज सेवा के क्षेत्र में एक सशक्त हस्ताक्षर के रूप में उभरकर सामने आई हैं। एम.ए., बी.एड. एवं एम.ए. (एजुकेशन) जैसी उच्च शैक्षणिक उपाधियों से संपन्न मोहिनी जी ने शिक्षा के साथ आध्यात्मिक साधना को भी अपने व्यक्तित्व का हिस्सा बनाया है। वे वर्तमान में श्री फलौदी मेटरनिटी एंड जनरल हॉस्पिटल, राजगढ़ की डायरेक्टर के रूप में सेवाएं दे रही हैं।
साहित्यिक यात्रा की शुरुआत हास्य विधा से करने वाली मोहिनी गुप्ता आज कविता, गीत, हाइकु, कहानी, निबंध और संस्मरण सहित अनेक विधाओं में सक्रिय हैं। अल्प शब्दों में गहन भाव व्यक्त करना उनकी लेखनी की विशिष्ट पहचान है। वर्ष 2024 में लखनऊ में “भारत रत्न अटल सम्मान” तथा फरवरी 2026 में इंदौर में “हिंदी रत्न सम्मान” से अलंकृत होना उनकी साहित्य साधना का प्रमाण है। उनका एकल काव्य संग्रह “ओस की एक बूँद” तथा साझा संकलनों में प्रकाशित रचनाएँ पाठकों के हृदय को स्पर्श करती हैं। वे साहित्य को समाज परिवर्तन का सशक्त माध्यम मानती हैं।
