गुरु ज्ञान के कूप से – कोमल स्वामी

गुरु ज्ञान के कूप से – कोमल स्वामी
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गुरु ज्ञान के कूप से,
घट-घट बांटे ज्ञान।
कभी कला के रंग बिखरे,
कभी मजबूत करें विज्ञान।
गुरु हवा में घोल रहे हैं,
नैतिकता का भाव।
कभी करारी धूप बने,
कभी बनते ठंडी छांव।
गुरु ज्ञान की नींव है,
गुरु ज्ञान का सार।
जितना बांटे बढ़ता जाए,
गुरु ज्ञान उपहार।
एकलव्य से शिष्य गुरु के,
पाकर गुरु से ज्ञान।
बेझिझक कर देते क्षण में,
अंगूठा अपना दान।
गुरु कृपा से अर्जुन हो गए,
धनुर्धारी महान।
सारथी जिनके बन बैठे,
स्वयं कृष्ण भगवान।
है गुरु वचन “रेखा पत्थर पर”,
गुरु ज्ञान का डेरा।
गुरु, गुरु ही होता है,
चाहे तेरा हो या मेरा।
गुरु ज्ञान बिन स्याही सूनी,
स्याही बिन हर पन्ना।
गुरु बनाए शिष्य को सफल,
सकल चौकन्ना।
कोमल स्वामी की कलम झुके,
उन गुरुओं के सम्मान में
जिनकी मेहनत सांसे भरती
कला और विज्ञान में।
कोमल स्वामीरामपुरा बिश्नोईयां, गोरीवाला (सिरसा)
हरियाणा
