काव्य कदम साहित्यिक संस्था का मासिक कवि सम्मेलन चंडीगढ़ मे हुआ।

काव्य कदम साहित्यिक संस्था का मासिक कवि सम्मेलन चंडीगढ़ मे हुआ।
सारा सच (चंडीगढ़) दिनांक 28 मार्च 2026 को ‘काव्य कदम’ साहित्यिक संस्था (हरियाणा) का मासिक कवि सम्मेलन प्रदेशाध्यक्ष बलवान सिंह ‘मानव’ की अध्यक्षता में टी. एस. सेंट्रल स्टेट लाइब्रेरी सेक्टर-17 (चंडीगढ़) के सौजन्य से हुआ।
कवि सम्मेलन के मुख्य अतिथि कवयित्री अनीता नरवाल और सिरसा से विशेष आमंत्रित अतिथि कोमल स्वामी रहीं। मंच संचालन सीमा चहल ‘पुष्प’ द्वारा किया गया। मशहूर ग़ज़लकार राजन तेजी ‘सुदामा’ ने अपनी खूबसूरत ग़ज़ल ‘बाद तेरे आज मेरी ज़िन्दगी को क्या हुआ है, तमस अब हर जगह ये रोशनी को क्या हुआ है’ पेश कर मिशाल कायम की।
अध्यक्ष बलवान सिंह ‘मानव’ ने ‘अपने में ही बह गया हूँ मै, आधा था आधा ही रह गया हूँ मैं’ सुनाकर सबको भावुक कर दिया। मुख्य अतिथि अनीता नरवाल ने अपनी ग़ज़ल ‘खुद ही महफिल वो सजा लेंगे हमारा क्या है, लाज अपनी वो बचा लेंगे हमारा क्या है’ पेश कर सबका मन मोह लिया। कवि वीरेंद्र राय ने ‘बरसों बाद की वह बरसात’ सुनाकर सबको भावुक कर दिया। ममता ग्रोवर ने ‘पतझड़ चली गई आकर बहार अभी बाक़ी है, मकाँ को घर बनाने का ख़ुमार अभी बाक़ी है’ सुनाकर खूब तालियां बटोरीं। हास्य कवि अश्वनी मल्होत्रा ‘भीम’ ने हास्य कविता ‘सुबह सवेरे एक दिन मैं गली में जा रहा था, दूर खड़ा एक कुत्ता मुझे ही देखे जा रहा था’ सुनाकर श्रोताओं को खूब गुदगुदाया। स्मृति शर्मा ने अपनी ओजस्वी रचना ‘ये नन्हा दीपक जो जल रहा है घने अँधेरे को खल रहा है’ सुनाकर श्रोताओं में जोश भर दिया। युवा कवयित्री करिश्मा वर्मा ‘किट्टू’ ने मां पर सुंदर रचना ‘वो एक हस्ती भगवान से कम नहीं है,
उनका आँचल आसमान से कम नहीं है’ सुनाकर मंत्रमुग्ध कर दिया। देवयानी पुरी ने ‘यूँ तो आज बहुत आधुनिक हो गए हैं हम, लेकिन इस आधुनिक समाज से पूछती हूँ कि मेरा अस्तित्व क्या है’ सुनाकर वर्तमान परिवेश पर कटाक्ष किया। संदीप भगवाड़िया ने दर्दभरी ग़ज़ल ‘मेरे जख्मों की तरफ तू भी नजर करके तो देख, है गुजरता किस तरह तन्हा सफर करके तो देख’ कही। शशि जरोड़िया ने खूबसूरत ग़ज़ल ‘तुझे क्या ख़बर मेरे हमसफ़र मेरा मरहला कोई और है’ कहकर वाहवाही लूटी। प्रभात पांडेय ने मुक्तक ‘धीरे-धीरे सही चल रही ज़िंदगी, तेरे अभाव में जल रही ज़िंदगी’ सुनाकर धाक जमा दी। कुमार शशि ‘गुरु’ ने अधूरे प्रेम पर ‘एक कहानी ऐसी भी…
जो शुरु तो हुई थी मुस्कुराहटों से’ सुनाकर प्रेम रस की बौछार कर दी। विश्वजीत सिंह शब्द जी ने समय पर बहुत सुंदर प्रस्तुति दी –
समय के दो राहों पर खड़ा हूं
एक ओर जाऊं तो दर्शन छूटे
दूसरी ओर जाऊं तो मनन छूटे।
मीना जागलान ने ‘मैं कोई बड़ा शब्द नहीं, बस एक सच्ची भावना हूँ’ पेश कर सबको मुग्ध कर किया। सिरसा से विशेष अतिथि के रूप में पधारी कवयित्री कोमल स्वामी जी ने देश पर अपनी रचना व्यक्त की –
वतन चाहे मेरा हो किसी ओर का,
कोई किसी के विरुद्ध युद्ध न हो।
इस अवसर पर पाल अजनबी, नीरजा शर्मा, राकेश सिंह, नवनीत सिंह बक्शी, ममता ग्रोवर आदि अन्य कवियों ने भी अपनी रचनाओं से खूब शमां बांधा। संस्था के प्रदेश प्रवक्ता राम कुमार वर्मा ‘राम’ और पूर्व कोषाध्यक्ष राज गुणपाल ‘बालकिया’ ने सम्मेलन की सफलता पर हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं दीं। अंत में, रचनाकार अतिथियों, टी. एस. लाइब्रेरी की अध्यक्षा नीजा सिंह और अन्य साहित्यकारों को सम्मानित किया गया। श्रोताओं ने साहित्य रसास्वादन का खूब आनंद उठाया।
