April 11, 2026

भक्त – डॉ० उषा पाण्डेय ‘शुभांगी’ 

भक्त – डॉ० उषा पाण्डेय ‘शुभांगी’

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भक्त और भगवान का, नाता बड़ा विलक्षण है।
प्रभु भी अपने भक्त संग, रहते हर पल, हर क्षण हैं।
भक्त शब्द ‘भज्’ धातु से बना है,
शाब्दिक अर्थ सेवा करने वाला।
तन, मन, धन से खुद को,
प्रभु को समर्पित करने वाला।
भक्त थे संत तुलसीदास जी,
स्वयं को प्रभु का सेवक कहते  थें।
अपने प्रभु के प्रति,
अटूट विश्वास मन में रखते थें।
‘रामहि केवल प्रेम पियारा’, तुलसीदास जी के वचन।
भक्त सबसे मिल कर रहते,
निर्मल होता इनका मन।
भक्त अपने प्रभु से,
नि:स्वार्थ प्रेम करते हैं।
सुख-दुख में समान रहते, अहंकार वे तजते हैं।
सच्चे भक्त की प्रवृत्ति, सात्विक होती है।
भक्त निष्ठावान होते हैं, इनकी वाणी मीठी होती है।
नवधा भक्ति का ज्ञान प्रभु ने, माता शबरी को दिया।
संत तुलसीदास जी ने ‘नवधा भक्ति’ का वर्णन, ‘रामचरितमानस’ में किया।
श्रवण, कीर्तन, स्मरण, पादसेवन, अर्चन, वंदन, दास्य, सख्य, आत्म निवेदन, नवधा भक्ति कहलाता है।
जिसने इन्हें अपना लिया, वही सच्चा भक्त माना जाता है।
सहनशील होते हैं भक्त, बाधाओं से नहीं डरते हैं।
दया करते हैं जीवो पर, क्षमा सभी को करते हैं।
जो मिलता है उसमें संतोष करतें, संतों से प्रेम करते हैं।
प्रतिकूल परिस्थितियों में भी, धैर्य बनाए रखते हैं।
आडंबर से दूर रहते, किसी के साथ कभी करते नहीं दगा।
प्रेम सभी से करते हैं, पराया हो या सगा।
शील स्वभाव से युक्त ये, कर देते हैं सबको माफ।
तन इनका पवित्र होता, मन होता  इनका साफ।
लालच मन में होता नहीं, भक्ति करते हैं निष्काम भाव से।
दूसरों के लिए जीते हैं, औरों की मदद करते बड़े चाव से।
ईश की भक्ति में भक्त, सदा खुद को समर्पित करते।
प्रभु तो प्रेम के भूखे होते, अपने भक्तों की रक्षा वे स्वयं करते।
सच्चे भक्त हम सब हो जाएं, सकारात्मक ऊर्जा से हम भरे रहेंगे।
मानसिक सुख मिलेगा हमको,
छल, प्रपंच से दूर रहेंगे।
भक्ति से शक्ति मिलती, जीवन सँवर जाता है।
सच्चा भक्त तो समाज में, भाईचारा फैलाता है।
डॉ० उषा पाण्डेय ‘शुभांगी’
स्वरचित
वैस्ट बंगाल

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