April 10, 2026

ललित कुमार – गुरु कौन हैं 

ललित कुमार – गुरु कौन हैं

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आओ बतलाऊँ  तुम्हें
गुरु आखिर  कौन हैं ?
हिन्दी का हर एक स्वर
गुरुओं की  गौरव गाथा गा रहे
कैसा हो सच्चा गुरु यही हमको  बतला  रहे
 *अ* से अज्ञान से ज्ञान तक का मार्ग जो दिखला रहे
 *आ* से आदर्श  बन जीवन पथ समझा  रहे। जो
 *इ* से इस भूलोक  से परलोक तक देखा  करें
 *ई* से ईश्वर  रूप बन व्यक्तित्व  की रचना  करें
 *उ* से उपकार हर एक प्राणि पर करते हैं वो
 *ऊ* से ऊँचाई तक पहुंचने की हिम्मत भरते हैं जो
 *ऋ* से ऋषि  बन सुख और एश्वर्य  का वरदान दें
 *ए* से सबको एक सी शिक्षा और ज्ञान  दें
 *ऐ* से हर ऐब को छाँटा  करते हैं जो
 *ओ* से ओस की बूंद सा शीतल कर देते हैं मन
 *औ* से औषधी  बन हर  पीड़ा लेते हैं हर
 *अं* से अंधकार दूर कर उजाले देते हैं भर
 *अः* से नि:स्वार्थ  सेवा कर उत्थान करते हैं जो
सही मायनों में सच्चे गुरु होते हैं वो
आओ देखें,
वर्णमाला  का हर  अक्षर  भी कुछ कह रहा
गुरु  वही जो,
 *क* से कर्म के कुरुक्षेत्र के कृष्ण बन जाते हैं जो।
 *ख* से खुद राह पर चल, सही राह  दिखलाते  हैं वो
 *ग* से गीता का सार  समझाया करें
 *घ* से घोर अत्याचार सहना नहीं ये बल हम में भरें
 *ङ* से बन गंगा सा पाप मुक्त  कर देते हैं वो
 *च* से चरित्र  का निर्माण किया करते हैं जो
 *छ* से छोड़कर गुरु रण को कभी जाते नहीं
 *ज* से जीवन जीना  सिखलाते वही
 *झ* से झूठ न कहे कभी और सच के पीछे  चलें
 *ञ* से हर मंच का रंजय बना देते हैं वो
 *ट* से हर हाल में टूटें नहीं है सच्चा गुरु
 *ठ* से ठोकरों से गिरकर जो संभलना सिखा दे
 *ड* से हर डर से जो लड़कर जीतना सिखला  दे
 *ढ* से ढूंढना जो सिखा दे मरुस्थल  में  पानी
 *ण* से रण में  हो न जिसका  कोई  सानी
 *त* से तैयार जो हर परिस्थिति  के लिए कर दे
 *थ* से थके हुए योद्धा  को जोश से फिर भर दे
 *द* से दर्द में अक्सर वो दवा का काम कर दे
गुरु वही जो
 *ध* से धरती पर धर्म से रहना सिखलाए हमें
 *न* से नापाक हों जब इरादे, सही राह दिखलाए हमें
 *प* से पाप और पुण्य में क्या है अंतर समझाए तुम्हें
 *फ* से फल की इच्छा न कर सिर्फ कर्म कर कहते हैं वो
 *ब* से हर बुराई  से मुक्त  करवाते वही हैं
 *भ* से हमारे भीतर की शक्तियाँ भी जगाते वही हैं
 *म* से मुसीबत  में मित्र  भी होते यही हैं
 *य* से यश इस विश्व  में दिलवाते  वही हैं
 *र* से रास्ते  की हर मुश्किलें  आसां  बना देते हैं जो
 *ल* से लक्ष्य को हासिल करें हिम्मत देते हैं वो
 *व* से विज्ञान  व अनुसंधान से विश्व का कल्याण कर
 *श* से शिक्षा के वरदान से हर क्षेत्र में सफलता भरें
 *ष* से है गुरु जो हर षडयंत्र  को विफल करें
 *स* से हर सवाल  का जवाब  देतें हैं वो
 *ह* से हर  घड़ी हर पल साथ ही रहते हैं जो
 *क्ष* से जो क्षमा  हर  गलती करें
 *त्र* से हमारी त्रुटियों को हर कदम सुधारा करें
 *ज्ञ* से दे ज्ञान का उजाला हमारे पथप्रदर्शक बनें
जिनके ज्ञान  का आदि  न कोई  अंत  है
जीवन  हो सफल  सभी का, जिनका मूल मंत्र है
अपनी शिक्षा के तेज से सुदृढ़ करते सारा तंत्र हैं
आओ, हम सब इनसे जीवन  का गुरुमंत्र  लें
निःस्वार्थ  सेवा और  सत्य पथ  पर चलते  रहें
सच्चे गुरुओं को हाथ जोड़,
सादर नमन करें।
सादर नमन करें।🙏🙏
स्वरचित  एवं मौलिक रचना
ललित कुमार
नई दिल्ली

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