नया साल – आशा ठाकुर

 

नया साल

नयी वर्ष की नयी सुबह पर
मिलकर नयी पहल करें
मुरझा गए है जो रिश्ते
प्रेम के जल को उनमें भरें।
नए साल में स्वागत है
खुशियों की बस इक चाहत है
नया जोश नया उल्लास
खुशियां फैलाए करे उजास
नए वर्ष में नयी पहल हो
कठिन जिंदगी ओर सरल हो
अनसुलझी जो रही पहेली
अब वो भी सुलझ जाएगी
जो चलता है वक्त देखकर
आगे जाके सफल हो जाए
नये वर्ष का उगता सूरज
सारे सच के साथ सुनहरा हो
सुनहरे सपनों की झंकार लाया है
सारे सच के साथ खुशियों के अनमोल उपहार लाया है
नयी सोच है, नयी उमंगे, नयी प्यास है जीवन में
सपनों को सच करना है नयी चाह है जीवन में
करना है वादा खुद से
आगे बढ़ना है जीवन में
बीते पल में जो मिले दुःख
भूलना है उन्हें जीवन में
धरा ठिठुरती है सर्दी से
आकाश में कोहरा गहरा है
फूलों कलियों की सरहद पर
सर्द हवा का पहरा है
सुना है प्रकृति का आंगन
कुछ रंग नए, उमंग नए
ओस सुबह की फिर चमकी
बिखरा करके छटा निराली
चेहरे दमके बगिया महकी
घर-घर होली और दीवाली
पहचान लिया ख़ुद को
तो जिंदगी का हर पल नया
ख़ुद को बदल देने का ख़्याल लाए
यू ही नया साल आए
नयी उम्मीद की नयी किरणें
बाहें पसारकर खड़ी है
एक बड़ी भीड़ में नहीं खोया
ये साल नयी पहचान लाया
अपने घर, समाज और देश से
कर ले इतना प्यार की
हम सब एक ही है
ये दुनिया को बता दे
कोई नया हुनर सिखे
जमाने को बता दे
हर चेहरे पर हंसी रहें
ना चिंता ना भय रहें
रहें हमेशा सफलता का साया
खुशियों भरा समय हो हमारा
सहज सरल मन से
सबको गले लगाया
ऊंच-नीच भेद-भाव
अंदर से सब मिटाया
समय हमारा साथ दे
कुछ ऐसी आगे उम्मीदे है
सुख के चौके पूरे हर द्वारे
खुशियां आंगन में हो हर पल हमारे
आरंभ से अंत तक है जाना
गिनती का नंबर बदल जाना
वर्तमान का इतिहास बन जाना
उदये होते सूरज का ढल जाना
खिल के फूल का डाल से उतर जाना
दे के जन्म माँ के अञ्चल ममता से भर जाना
एक दर्द भूल कर सुख को पहचान जाना
यही से है हमने नयी साल को पहचानना।

आशा ठाकुर
.चंडीगढ़