वृक्ष है संजीवनी – अश्मजा प्रियदर्शिनी

वृक्ष है संजीवनी
वृक्ष है संजीवनी हमारी वसुंधरा की हैं शान।
धरती को स्वर्ग बनाते, जैसे ईश्वर का वरदान।
प्राणवायु देते भरते हर जीव-जन्तु में जान।
वृक्षों की शाखाओं पर बसते खग के प्राण।
चमन में फूल खिलते महकते घर बगवान।
#सारासच है वृक्षों है पर्यावरण की आन,
आन-बान और शान।
वृक्ष है वसुंधरा के हरीतिमा के आभूषण।
धरती को सुख देते दूर करते प्रदूषण।
अन्न, औषधि, लकड़ी रबर, गोंद, कागज ,
मशाले, कपास, फल-फूल का देते अक्षय दान।
फल, फूल, सब्जी संग देते स्वच्छ हवा प्रदान।
विविध सामग्री देना वृक्ष की है पहचान।
जीवन में वृक्ष लाते चेहरे पर मुस्कान।
स्वयं जहरीले कार्बन डाइऑक्साइड पीते
शिव की महिमा सदृश्य है अद्भुत एहसान।
ऐसी सुन्दर वसुधा पर है हमें अभिमान।
अपनी वसुधा की रक्षा कर सकूँ है ये अरमान।
पर आधुनिकता के पथ में है कई व्यवधान।
करना होगा हमसब को समस्या का समाधान।
सारा सच है वृक्ष है संजीवनी धरा की है आन- बान और शान।
ग्लोबल वार्मिंग से बचने का करना है निदान।
हर प्राणी पौधे लगाए करे पर्यावरण का कल्याण।
वृक्षों के गहनों से सजे धरा जारी है दिव्य अभियान।
सारा सच है सदियों से वृक्ष है पर्यावरण की आन -बान और शान।
स्व-रचित :अश्मजा प्रियदर्शिनी पटना बिहार