बदला – रमा भाटी

कविता “बदला” वाह रे इंसान किया तूने कर्म बहुत महान कहर कुदरत का उत्तराखंड में ले आया फिर प्रलय एक बार जो बना गया तपोवन को श्मशान क्या सोचा था तुमने इन्सा नहीं लेगी प्रकृति तुमसे बदला। जाने कितने उजड़… Read more »

घुंघट का सच – सीमा टेलर

  घुंघट का सच #sarasach #सारासच #hamarivani #हमरिवाणी घुंघट में ढका हो चेहरा या फिर पहचान छिपी हो हिजाब में, प्रथा यह कौन सी, कीमत जो चुकाई नहीं है हिसाब में। माना सुंदर मुखड़े को निर्वस्त्र करती... Read more »

श्रद्धांजलि – कमलेश शर्मा

श्रद्धांजलि“ ए मेरे वतन के लोगों.. मैं लता… सुनो मेरी व्यथा। कल तक थी मैं भी.. आप सभी के बीच। पावन..निश्छल..गदगद। मुझे भी नेह था …ज़िंदगी से.. अपनों से.. आपसे..आपकी हर बात से। मुझ में भी चाहत थी…गीत गाने की…… Read more »

आम जनता – अनन्तराम चौबे

अंतरराष्ट्रीय हिन्दी साहित्य मंच हमारी वाणी विषय… आम जनता नाम.. अनन्तराम चौबे अनन्त जबलपुर म प्र कविता… आम जनता स्वतंत्र देश में स्वातंत्रता का बस नाम सा ही तो रह गया है । देश की बनती नीतियों के आगे आम… Read more »

विरोध करें तम्बाकू व्यसन का – संजय वर्मा “दॄष्टि 

विरोध करें तम्बाकू व्यसन का तंबाकू ने बड़ा दुर्व्यसन का धारण कर लिया है|इसका स्वास्थ्य के हित मे विरोध होना चाहिए ।बच्चों से लेकर वृद्ध तक इसे मुख से भरे मिल जाएंगे|भोजन लार... Read more »

संविधान – सीमा टेलर – राजस्थान

“संविधान” कुछ सपने, आतुर है आने को मन मस्तिष्क में घर करने को। मनचाहा करूं, या फिर मैं सिखाए “सिद्धांत” चलूं। नई नहीं, कशमकश यह तो पुरानी रे, ले तर्क की झड़ी रणभूमि तैयार खड़ी रे। स्वतंत्रता के परवानों ने… Read more »

गरीबी – कु दुलेश्वरी मांझी

*शीर्षक – ” गरीबी “* किसने देखा है अमीरों को गरीबों के गलियों से गुजरते हुए, किसने देखा उन्हें बाजारों में कभी मोल भाव करते हुए, बिक जाती है जनाब यह ज़िंदगी इस मोल भाव की तरजू पर, देखते... Read more »

नया साल – आशा ठाकुर

  नया साल नयी वर्ष की नयी सुबह पर मिलकर नयी पहल करें मुरझा गए है जो रिश्ते प्रेम के जल को उनमें भरें। नए साल में स्वागत है खुशियों की बस इक चाहत है नया जोश नया उल्लास खुशियां… Read more »

विधार्थी – डॉ अशोक (बिहार)

विधार्थी। विधा चाहने वाला विधार्थी, कहलाता है। यह ज्ञान रूपी उपक्रम में, बालक किशोर युवा व, वयस्क भी उन्नत भाव में, समाज के इस जंग में , हृदय से उतर आता है। सुख चाहने वाले विधार्थी, यह सुख कभी नहीं… Read more »

मौकापरस्त – डॉ अशोक (बिहार)

  मौकापरस्त। यह अवसरवादी संस्कार है, निम्नतापी पुरस्कार है। उपयुक्त अवसर की तलाश, शरारती खेल है, दुनिया में खलबली मचा देने, वाला यह मेल है। जमानासाज अवसरवादी भी, खूब कहलाता है। कभी -कभी मोहब्बत इबादत , और नफ़रत भी, मौकापरस्त… Read more »