मौकापरस्त – डॉ अशोक (बिहार)

 

मौकापरस्त।
यह अवसरवादी संस्कार है,
निम्नतापी पुरस्कार है।
उपयुक्त अवसर की तलाश,
शरारती खेल है,
दुनिया में खलबली मचा देने,
वाला यह मेल है।
जमानासाज अवसरवादी भी,
खूब कहलाता है।
कभी -कभी मोहब्बत इबादत ,
और नफ़रत भी,
मौकापरस्त हो जाता है।
यह ज़िन्दगी में ज़िन्दगी को ,
एक नसीहत दे जाता है।
ज़िन्दगी के सफ़र में थोड़ा बहुत,
शतरंज के खिलाड़ी,
के समान होना भी जरूरी है।
मौकापरस्ती को,
संभालने के लिए,
खूब करनी पड़ती तैयारी है।
मौकापरस्त मौका-ए-वारदात भी,
खूब कहलाता है।
ज़िन्दगी में यह कभी भी,
सद्भाव नहीं पाता है।
सुविधावादी और दल-बदलू भी,
कभी- कभी कहलाता है।
मौकापरस्त का यह श्रंगार ,
कहलाता है।
मौकापरस्त अपने लाभ का,
वृहद उपक्रम है।
समाजिक जीवन में यह ,
शरारती व खतरनाक पराक्रम है।
लालची सम्राज्य में यह ,
एक ज़हर रोग है।
सभ्यता के लिए यह,
नहीं कभी योग्य है।
सारा सच इस श्रेत्र में,
एक उत्कृष्ट व प्रभावी,
कार्य कर रहा है यहां।
हिंदी गद्य पदध संवर्ग की,
प्रतिभा उभारकर बड़ी सिददत से,
जीवन की सीख दे रहा है यहां।
वक्त परस्त अवसर्ग व,
अवसादी भी कहलाता है।
समाज में यह संस्कार कभी,
उत्तम नहीं कहलाता है।
समयानुवरती अवतार नहीं,
यहां कभी स्वीकार्य है।
यह मानवीय मूल्यों का,
निम्नस्तरीय तिरस्कार है।
मौकापरस्त विश्वासघात का ,
कभी नहीं कभी नहीं रहता,
उत्तम संस्कार है।
संस्कृति कोश में भी नहीं,
इसका कोई उपचार है।
अवसर साधक का यहां ,
दिखता न्यूनतम रूप है।
जगत- संसार में ,
कहीं नहीं दिखता ,
कभी अच्छा प्रारूप है।
धन वैभव और ऐश्वर्य की ,
यहां बढ़ जाती बड़ी लालसा है।
इस भाव व संस्कार के इस उपक्रम से,
मौकापरस्तों की बढ़ा देती ,
बड़ी -बड़ी अभिलाषा है।
अवसर की ताकत में रहने वाला,
मौकापरस्त का सदैव दिखता,
निम्न संस्कार है।
जनमानस में यह प्रवृत्ति,
कभी नहीं रहता स्वीकार्य है।
मौकापरस्त निर्लज्ज मक्कार,
झूठा यह उपक्रम कहलाता है।
ज़िन्दगी में ज़िन्दगी से,
दूर करना सिखाता है।
बेगैरत घमंड व न्यूनतम योग्यता,
मौकापरस्त का श्रंगार है।
जन-जन तक यह कुटिल ऐश्वर्य ,
नहीं रहता स्वीकार्य है।
नफरतें सरेआम करने का,
यह महत्वपूर्ण आधार है।
जन-जन तक यह उपक्रम,
बड़ा समाजिक प्रहार है।
ईश्वर कभी मौकापरस्त,
नहीं होते हैं यहां।
मनुष्यों में यह फितरत ,
दिखती है हरपल यहां।
सारा सच का यह उधम ,
धूम मचाने वाला व्यवहार है।
दैनिक भाव में दिखता सदैव,
बहुत उन्नत संस्कार है।
डॉ० अशोक, पटना, बिहार।