पानी – डॉ० अशोक

पानी – डॉ० अशोक
यह धरती की धड़कन है।
यह जीवन का आधार है।
पानी बूँद-बूँद गिरता है।
हर बूँद छोटे कदम से शुरू होती है।
धीरे-धीरे यह नदी बनती है।
फिर समंदर में शामिल हो जाती है।
लेकिन पानी सिर्फ छोटे कदम नहीं चलता।
कभी बड़े कदम भी उठाता है।
बाढ़ बनकर चेतावनी देता है।
सूखा बनकर हमारी भूलों का हिसाब मांगता है।
बड़े कदम ताक़त दिखाते हैं।
छोटे कदम रास्ता बनाते हैं।
पानी हर पड़ाव पर जद्दोजहद करता है।
झरने में यह खिलखिलाता है।
तालाब में यह ठहरता है।
नदी में यह रास्ता बनाती है।
छोटे कदम और बड़े कदम मिलकर जीवन बचाते हैं।
सारा सच अखबार हमें याद दिलाता है।
पानी की हर छोटी-बड़ी खबर महत्वपूर्ण है।
कभी आँकड़ों में दिखता है।
कभी गांवों की प्यास में।
कभी नदियों की दुर्दशा में।
कभी बरसात की कहानियों में।
यह हर बारिक पहलू और जद्दोजहद दिखाता है।
छोटे कदम।
बड़े कदम।
सारा सच अखबार।
मिलकर सिखाते हैं।
पानी की हर बूँद की क़द्र करना ज़रूरी है।
यह हमारे और आने वाली पीढ़ियों का भविष्य है।
डॉ० अशोक, पटना,

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