सात सुरों – दिशा सिंह

सात सुरों की तान लगाकर
प्रेम प्रणय का रस बरसाकर
सुख को अपने पास बुलाकर
दुख को गहरी नींद सुलाकर
सांसों में सरगम अधरों पर मिश्री घोल रही
कान्हा की बांसुरिया राधे राधे बोल रही
   जब जब बजती पागल करती
   छम छम मेरी पायल बजती
    नाच रहे खग मृग नभ धरती
    पवन उमड़ती बदरी झरती
मन के लाज शर्म वाले घूंघट पट खोल रही
कान्हा की बांसुरिया राधे राधे बोल रही
    मथुरा निधिवन वृंदावन में
    बरसाने की कुंज ग़लिन में
    गोवर्धन के हर तृण तृण में
    जा ब्रज मंडल के कण कण में
  प्रेम तराजू स्वास स्वास कस्तूरी तोल रही
   कान्हा की बांसुरिया राधे राधे बोल रही
   दिशा सिंह ,
उत्तर प्रदेश ✍️

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