गुरु ज्ञान का शिलालेख है – डाॅ० योगेश सिंह धाकरे “चातक”

गुरु ज्ञान का शिलालेख है – डाॅ० योगेश सिंह धाकरे “चातक”
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प्रलय को रोकता है ।
निर्माण को पालता है ।
गुरू अवचेतन मन के,
तथ्यों को पहचानता है ।।
बल” विद्या” बुद्धि” विवेक,
संस्कार के प्रदाता को नमन ।
वेद “पुराण “चारो दिशा,
आठों याम के ज्ञाता को नमन ।
शिक्षक ही “दिशा”दशा” तय
करतें है,उज्वल भविष्य की ।
शिल्पकार बन प्राण प्रतिष्ठा, ..
योग्य बनने वाले व्यक्तित्व की ।
गुरु के “ज्ञान “जप “तप” की,
परिणिती समाज में झलकती है ।
नस्लैं और “सभ्यतायें” इनके,
अथक प्रयासो से ही निखरती है ।
समाज और राष्टृ निर्माण मै, ..
नीव” का शिलालेख होता है ।
गुरु ज्ञान विज्ञान उपनिषिद..
पुराणो का आलेख होता है ।
विदित प्रतिविदित विषय के..
प्रश्नो की परीक्षा को नमन ।
गुरु गोविन्द की संत कबीर..
वाली समीक्षा को नमन ।।
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स्वरचित..
डाॅ० योगेश सिंह धाकरे “चातक”
{ ओज कवि } अलीराजपुर म.प्र.
