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धरती की पुकार – डॉ अनुपमा वर्मा ‘हेमा ‘

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धरती की पुकार – डॉ अनुपमा वर्मा ‘हेमा ‘
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मत काटो इन पेड़ों को, ये जीवन की साँस हैं,
इनसे ही तो महक रही, धरती और आकाश हैं।
हरियाली का आँचल ओढ़े, प्रकृति मुस्काती है,
पत्तों की सरगम में छिपकर, मधुर गीत गाती है।
वायु, जल और धूप सभी का, सुंदर संतुलन है,
इनके बिन मानव जीवन का, सूना हर आँगन है।
लोभ की अंधी दौड़ में हमने, जंगल बहुत उजाड़ दिए,
अपने ही हाथों से कितने, जीवन-दीप बुझा दिए।
अब भी समय है जागो मानव, प्रकृति का मान करो,
एक-एक पौधा रोपकर तुम, धरती का सम्मान करो।
जब हर कोना हरा-भरा होगा, खुशियों का विस्तार होगा,
स्वच्छ वायु के संग जीवन में, नव उत्साह अपार होगा।
आओ मिलकर प्रण ये लें, हर वर्ष वृक्ष लगाएंगे,
धरती माँ की रक्षा करके, सुंदर कल बना जाएंगे।
पर्यावरण की रक्षा ही, मानव का सच्चा धर्म है,
हरियाली से ही जीवन में, सुख, शांति और कर्म है। 🌿🍃
डॉ अनुपमा वर्मा ‘हेमा ‘
पंजाब

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