प्राचीन – सपना

प्राचीन – सपना
प्राचीन समय
मिट्टी की गंध में बसा है,
जहाँ पगडंडियाँ,
इतिहास की साँसें सुनाती हैं।
पत्थरों पर उकेरी गई रेखाएँ,
आज भी,
काल के प्रश्नों का उत्तर हैं।
वहाँ शब्द,
ऋषियों की वाणी बनकर,
हवा में गूँजते थे,
और मौन,
ज्ञान का सबसे ऊँचा शिखर था।
दीपक केवल उजाला नहीं,
दिशा भी हुआ करते थे।
प्राचीन सभ्यता,
नभ में नहीं,
मनुष्य के मन में बसती थी,
जहाँ जीवन,
भोग नहीं,
साधना था।
नदियाँ,
केवल जल नहीं,
संस्कृति की धमनियाँ थीं,
और वृक्ष,
पूजा से पहले,
संरक्षण सिखाते थे।
प्राचीन काल में,
समय,
भागता नहीं था,
चलता था,
ऋतु की चाल से,
सूर्य की परिक्रमा से।
आज भी,
जब वर्तमान थक जाता है,
तो समाधान,
प्राचीन की गोद में,
सिर रखकर,
आराम पाता है।
क्योंकि प्राचीन.
बीता हुआ नहीं,
जड़ों में बहता,
अमर विवेक है।
परिचय
नाम – सपना
जन्म स्थान – दिल्ली

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