
माईं हमारी है अनमोल
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इसका नही है कोई मोल।
ईश्वर ने दिया अपना –
स्वरूप है,
सृष्टि कर किसी आत्मा
की सम्पूर्ण इंसान बना-
देती है।
कर्तव्य और अधिकार-
का ज्ञान देकर गुरू सम
बन जाती है।
प्रथम गुरू का खिताब
पाती,
शिशु,बालक व प्रौढ़ –
अवस्था तक अपना
दायित्व निभाती।
मां नही हमारी पराई है
इसके आंचल के तले
जीवन हमारा स्वर्गीय –
है।
माईं हमारी है अनमोल,
इसका नही है कोई मोल।
