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काव्य कदम’ के मासिक कवि सम्मेलन में सजी साहित्यिक संध्या

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सारा सच (चंडीगढ़) 23 मई 2026 हरियाणा की साहित्यिक संस्था ‘काव्य कदम’ द्वारा आयोजित मासिक कवि सम्मेलन सेक्टर-17 स्थित टी.एस. सेंट्रल स्टेट लाइब्रेरी, चंडीगढ़ में संस्था के अध्यक्ष बलवान सिंह ‘मानव’ की अध्यक्षता में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। कार्यक्रम की मुख्य अतिथि डॉ. मेजर नीलम कुमारी रहीं, जबकि विशिष्ट अतिथि के रूप में चंडीगढ़ पुलिस के सहायक उपनिरीक्षक हरीश पांडेय और डॉ कुलवंत कौर उपस्थित रहे। मंच संचालन युवा कवयित्री करिश्मा वर्मा ने प्रभावशाली ढंग से किया।
कार्यक्रम में विभिन्न कवियों और शायरों ने अपनी उत्कृष्ट रचनाओं से साहित्यिक वातावरण को जीवंत बना दिया। सर्वप्रथम संस्था की महिला शक्ति द्वारा स्वागत गीत-
“मै, तुम नहीं, हम हैं काव्य क़दम” प्रस्तुत किया गया। डॉ० अनुपमा वर्मा ‘हेमा’ ने अपनी कविता “आज का बचपन कैसा है, मोबाइल में ही रहता है” के माध्यम से सोशल मीडिया के दुरुपयोग पर तीखा कटाक्ष किया। ट्राइसिटी के सुप्रसिद्ध ग़ज़लकार राजन तेजी ‘सुदामा’ ने हास्य रचना “कार में उसकी कहीं हम कुछ भी जब खाने गए, तेल पहले जेब से हर बार डलवाने गए” सुनाकर श्रोताओं को खूब गुदगुदाया। संस्था की उपाध्यक्षा अनीता नरवाल ने अपनी ग़ज़ल “जीवन मज़ा नहीं तो सज़ा भी नहीं जनाब” प्रस्तुत कर सराहना बटोरी। वरिष्ठ कवि वीरेंद्र राय ने “प्याले में कुछ बूंदें चाय की” सुनाकर महफ़िल को भावपूर्ण बना दिया। जीरकपुर से आईं कवयित्री जया सूद ने नारी सशक्तिकरण पर आधारित कविता “आज की नारी नहीं है किसी से कम, नहीं है वो अबला, बहुत है उसमें दम” प्रस्तुत कर खूब वाहवाही लूटी। हास्य कवि अश्वनी मल्होत्रा ‘भीम’ ने अपनी हास्य कविता “मेरा वार्डरोब” से सभी को हँसी से लोटपोट कर दिया। डॉ० रेखा मित्तल ने भावपूर्ण कविता “मैं यह नहीं जानती हूं कि तुम मेरे जीवन का सबसे सुंदर मौन हो” सुनाकर श्रोताओं का मन मोह लिया। वहीं राकेश कुमार ने रिश्तों की संवेदनाओं को अपनी रचना “खुदा तो उसका याद रहा लेकिन खुदाई भूल गया, पापा की विश तो याद रही दवाई भूल गया” के माध्यम से खूबसूरती से प्रस्तुत किया।
मंच संचालिका करिश्मा वर्मा ने शिक्षा के महत्व पर आधारित प्रेरणादायक कविता “गुरुजनों के ताज में कोहिनूर जड़ेंगे हम, खूब पढ़ेंगे, खूब बढ़ेंगे” सुनाकर सभी को प्रेरित किया। सुरेंद्र पाल सोनी ‘काकड़ौद’ ने विरह रस से ओतप्रोत कविता “तुम्हें पता है, तुम्हारे चले जाने के बाद भी लगता नहीं कि तुम चले गए हो” सुनाई। संदीप भगवाड़िया ने ग़ज़ल “जो मय का ही केवल नशा जानते हैं, नशा वो कहां इश्क का जानते हैं” पेश कर समां बांध दिया। विश्वजीत सिंह शब्द ने  दार्शनिक काव्य प्रस्तुति देकर माहौल में एक नई आस्था जगाई।
राज गुणपाल ‘बालकिया’ ने “मैं ऐसा हूं कि मैं वैसा हूं, कौन जाने मैं कैसा हूं” सुनाकर श्रोताओं को सोचने पर मजबूर किया। मंजू खोसला ने “कौन ले गया भाग हमारे” तथा मीना जागलान ने “तुम मुझसे लड़ते क्यों हो, और थोड़ी देर बाद मान भी जाते हो” प्रस्तुत कर कार्यक्रम को यादगार बना दिया। डॉ० कुलवंत कौर ने आशुकवि बन मौके पर ही अपनी रचना सुनाकर सुंदर प्रस्तुति दी। डॉ० निर्मल सूद ने माँ पर रचना “मां सोती कब थी, सूरज की किरणों से पहले जाग जाती थी” सुनाकर वाहवाही लूटी। शशि कुमार ‘गुरु’ ने शहीद भगत सिंह पर देश भक्ति रचना पेश की। सुखप्रीत सिंह ने “गाली ” शब्द पर बहुत सुंदर प्रस्तुति दी।
अंत में मुख्यातिथि ने संस्था को संबोधित कर अपने सुंदर विचार व्यक्त किए कि – “बेशक मेरा आर्मी का एक अलग ही क्षेत्र है, लेकिन आपकी काव्य क़दम संस्था में आकर मुझे भी कुछ नया सीखने का अवसर मिला है।”
विशिष्ट अतिथि हरीश पांडेय जी ने जनता और पुलिस के बीच प्रेम, सामंजस्य का भाव उत्पन्न करने के लिए ” समावेश” मुहिम के माध्यम से बहुत शानदार प्रस्तुति दी कि जनता का विश्वास किस प्रकार जीता जाय।इसके बाद मुख्य अतिथि, विशिष्ट अतिथि, एवं उपस्थित साहित्यकारों को सम्मानित किया गया। अन्य सम्मानित कविजन बलवान सिंह मानव, रवि कटारिया, सीमा चहल पुष्प, आस्था, सुरेंद्र कुमार सोईन आदि ने भी अपनी सुंदर प्रस्तुति दी।
श्रोताओं ने साहित्यिक रस का भरपूर आनंद उठाया तथा कवि सम्मेलन की भूरी-भूरी प्रशंसा की।

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