अरावली पर लेख – कंचनमाला ‘ अमर ‘(उर्मी)
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अरावली पर्वत भारत की सबसे प्राचीन पर्वत श्रंखलाओं में से एक है। अरावली का निर्माण करोड़ों साल पहले हुआ था, यह पृथ्वी की सबसे पुरानी भूवैज्ञानिक संरचनाओं में से एक है। यह पर्वतराज हिमालय से भी पुरानी है।
यह पर्वत श्रेणी भारत के उत्तर-पश्चिमी भाग में फैली हुई है और देश की भौगोलिक संरचना में महत्वपूर्ण स्थान रखती है। अरावली पर्वत श्रेणी गुजरात के पालनपुर क्षेत्र से प्रारंभ होकर राजस्थान, हरियाणा और दिल्ली से होते हुए लगभग 800 किलोमीटर तक फैली हुई है। इसका सर्वोच्च शिखर गुरु शिखर है, जो राजस्थान के माउंट आबू में स्थित है और इसकी ऊँचाई लगभग 1,722 मीटर है।
अरावली पर्वत का ऐतिहासिक और पर्यावरणीय महत्व अत्यंत अधिक है। यह पर्वत श्रेणी थार मरुस्थल को पूर्व की ओर फैलने से रोकने में सहायक है और दिल्ली-एनसीआर में धूल भरी आंधियों को नियंत्रित करती है। साथ ही यह क्षेत्र वर्षा जल के संरक्षण और कई नदियों की उत्पत्ति का स्रोत है, जिनमें लूणी,बनास और साबरमती प्रमुख हैं।
इस पर्वत श्रेणी में विविध प्रकार की वनस्पतियाँ और जीव-जंतु पाए जाते हैं। यहाँ काँटेदार झाड़ियाँ,शुष्क पतझड़ी वन और अनेक दुर्लभ प्रजातियाँ पाई जाती हैं। अरावली पर्वत क्षेत्र खनिज संसाधनों जैसे जस्ता, तांबा,संगमरमर और ग्रेनाइट के लिए भी प्रसिद्ध रहा है।
आज के समय में अरावली पर्वत अनेक पर्यावरणीय चुनौतियों का सामना कर रहा है, जैसे शहरीकरण,अवैध खनन, वनों की कटाई आदि । इन कारणों से इसका संरक्षण अत्यंत आवश्यक हो गया है। अरावली पर्वत न केवल प्राकृतिक धरोहर है, बल्कि यह भारत की जलवायु संतुलन और जैव विविधता के संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
अरावली पर्वत श्रेणी भारत की प्राकृतिक विरासत का एक अमूल्य भाग है, जिसका संरक्षण हमारी जिम्मेदारी है ताकि आने वाली पीढ़ियाँ भी इसके लाभों का आनंद ले सकें।
__कंचनमाला ‘ अमर ‘(उर्मी)

