साहित्य

हालातों से संघर्ष

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हालातों से संघर्ष:डॉ वाई कस्तूरी बाई

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सीख यही जीवन का प्रथम और अंतिम विधान है—
जो कठिनाइयों से टकराता है, वही महान है।
हालात कभी किसी के अपने नहीं होते,
वे तो मनुष्य के धैर्य और साहस की परीक्षा लेते हैं।
ज़िंदगी फूलों की सेज नहीं,
यह काँटों से सजी हुई डगर है।
यहाँ हर कदम पर मुश्किलें बाँहें फैलाए खड़ी हैं,
पर जो मुस्कराकर उनसे लड़ता है,
विजय उसी के चरण चूमती है।
समय सबसे बड़ा गुरु है।
यह किसी के लिए रुकता नहीं, झुकता नहीं।
जो इसकी गति के साथ चलना सीख लेता है,
वह असंभव को भी संभव बना देता है।
जो आलस्य और भय में डूब जाता है,
समय उसे इतिहास के अंधकार में छोड़ देता है।
निराशा मनुष्य की सबसे बड़ी शत्रु है।
वह भीतर की ज्योति बुझाकर
आशाओं का आकाश अंधकारमय कर देती है।
किन्तु साहस का एक दीपक
हजारों निराशाओं पर भारी पड़ता है।
सफल वही होता है,
जो गिरकर भी उठना जानता है,
हारकर भी मुस्कराना जानता है,
आँधियों में भी अपने लक्ष्य की दिशा पहचानता है।
जिसके संकल्प पर्वत से अटल हों,
जिसका पुरुषार्थ सागर से गहरा हो,
उसे कोई बाधा रोक नहीं सकती।
कामयाबी कभी भाग्य की भेंट नहीं होती;
वह अथक परिश्रम, अटूट विश्वास,
अविचल धैर्य और निरंतर संघर्ष की संतान होती है।
इसलिए उठो, जागो, स्वयं को पहचानो।
हालात बदलने की प्रतीक्षा मत करो—
अपने साहस से हालात बदल दो।
समय तुम्हारी परीक्षा ले सकता है,
पर तुम्हारा आत्मबल यदि अडिग है,
तो एक दिन यही संसार तुम्हारे संघर्ष को प्रणाम करेगा,
और तुम्हारी सफलता आने वाली पीढ़ियों के लिए
प्रेरणा का अमर दीप बन जाएगी।

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