साहित्य

मेरे प्यारे वतन – दिशा सिंह 

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मेरे प्यारे वतन – दिशा सिंह 
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मेरे प्यारे वतन मुझको तेरी कसम
जीत के गीत दोहराएंगे एक दिन
 सर झुकेगा नहीं शत्रु के सामने
सर कटा कर चले आयेंगे एक दिन
 प्रेम में जानकी राधिका हम बने
युद्ध में सोफिया व्योमिका हम बने
तन के पापों को धोए गंगा बने
तीन रंगो से शोभित तिरंगा बने
दे चुके हैं वचन तुझको ऐ सर जमी
तेरी मिट्टी में मिल जायेंगे एक दिन
 मेरे गीतों में झांसी की रानी रहे
शौर्य गाथा में मेरी कहानी रहे
जिंदगानी रहे न रहे ये मगर
हर दिशा में दिशा की निशानी रहे
इन रगों में अभी बह रहा जो लहू
देश के नाम कर जायेगे एक दिन
   ✍️ दिशा सिंह
उत्तर प्रदेश

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