साहित्य

नारी – अनिता शर्मा

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नारी – अनिता शर्मा

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जीवन पुस्तक का प्रारंभ और अंत पृष्ठ करती इति
कितनी संरचना ईश्वर की नारी ईश्वर की अनुपम कृति।।

प्राचीनता में नवीनता को रखे हृदय वो धारी
बदले युग में आकर देखो आसमान को छूती नारी।।

कठिन राहें जितनी भी थी पार किया तूने
पग कंटक थे जितने भी निकाल फेंके तूने।।

परम्पराओं की सेविका संग अपनाए आधुनिकता
नारी तुझसे ही मिलती संतान को संस्कार गीता।।

धर्म शास्त्र, वेद पुराण, शिक्षा और विज्ञान की
किया अध्ययन, बन अनुगामी, किस्मत निज प्रेरणा की।।

रही तन से दुर्बल किन्तु मजबूत मन की स्त्री है
परिश्रम, लगन, निष्ठा ही कथा एक स्त्री है।।

फर्श से लेकर अर्श तक आज उदाहरण बनी है जो
रखती नानी दादी की सीखे गांठें बाँध रखी हैं जो।।

उत्कृष्ट और श्रेष्ठता की लिखी कहानी भारी है
नहीं कहीं संशय है अब आसमान को छूती नारी है।।

अनिता शर्मा
देवास (मध्य प्रदेश)
मौलिक और स्वरचित।

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